सड़क हादसे में घायल हों या फिर गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों तुरंत हायर सेंटर रेफर किया जाता है। ऐसे में मरीजों की पीड़ा घटना की बजाय बढ़ जाती है। कई लोगों की जान तक चली जाती है। वेंटिलेटर ताले में बंद है, छोटी-मोटी बीमारियों को छोड़कर 70 प्रतिशत मरीजों को मुरादाबाद, मेरठ या दिल्ली के लिए रेफर किया जाता है।
मालूम रहे कि अमरोहा जिले की स्थापना 15 अप्रैल, 1997 को हुई थी। यह जिला पहले ज्योतिबा फुले नगर के नाम से जाना जाता था। जिला बनने से पहले अमरोहा मुरादाबाद का हिस्सा हुआ करता था। वजूद में आने के बाद जोया रोड किनारे पुलिस ऑफिस के पास संयुक्त जिला चिकित्सालय के नींव रखी गई है। जिला अस्पताल में डॉक्टर व अन्य स्टाफ के 52 पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां कई पद खाली है।
जिस समय यह जिला बना था उसे समय जिले की जनसंख्या करीब 18 लाख थी, जो अब 25 लाख के करीब पहुंच गई है। एक लोकसभा और चार विधानसभा वाले इस जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर तो हुईं, लेकिन आज तक जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड नहीं बन सका। जिसकी वजह से हर गंभीर मरीज को दिल्ली मुरादाबाद या मेरठ के लिए रेफर किया जाता है। कई बार आईसीयू की फैसिलिटी नहीं मिलने के कारण मरीज दम तोड़ देता है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले छह महीने में करीब 360 मरीज जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किए गए हैं। इसमें सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल और अन्य गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीज शामिल हैं।
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सीएचसी हसनपुर में भी बुनियादी सुविधाएं नदारद
हसनपुर में संभल-गजरौला मार्ग पर स्थित है। नगर की एक लाख की आबादी के अलावा करीब 20 गांव के ग्रामीण यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह चिकित्सकों की तैनाती नहीं होना है। यहां चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ध्रुवेंद्र सिंह फिजिशियन के अलावा फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और दंत रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया की तैनाती है। वहीं, यहां पर एक ही लैब टेक्नीशियन व एक फार्मासिस्ट समेत छह स्टाफ नर्स की तैनाती है। क्षेत्र और आबादी को देखते हुए यह स्टाफ काफी कम है। ऐसे में गंभीर मरीज को यहां से प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है।
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यह है जिला अस्पताल में डॉक्टरों की स्थिति
फिजीशियन के दो पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात है। चेस्ट फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पदों पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। बाल रोग विशेषज्ञ दोनों पद भरे हैं। एनेस्थेटिक्स के दो पदों के सापेक्ष एक डॉक्टर तैनात है। जनरल सर्जन के दो पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। ऐसे ही नेत्र सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं, जबकि ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। रेडियोलॉजिस्ट के दो पदों में एक ही डॉक्टर हैं, जबकि एक पद खाली है। चर्म रोग विशेषज्ञ में स्वीकृत एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। ईएमओ के तीनों पर भरे हुए हैं, अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है वह भी खाली है। जबकि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तैनात हैं।
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जिला अस्पताल में आईसीयू की व्यवस्था नहीं है। गंभीर मरीज को रेफर करना पड़ता है। दस बेड के आईसीयू की तैयारी चल रही है। - डॉ. चरन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक