अमरोहा। गोशालाओं को आत्म निर्भर बनाया जाए। वर्मी कम्पोष्ट, गोबर से कंडे व अन्य आवश्यक उत्पाद बनाए जाए जिससे गोशाला की आय बढ़ सके। कोई भी निराश्रित पशु सड़क पर नहीं दिखना चाहिए।
शुक्रवार को कलक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। विशेष सचिव परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश, नोडल अधिकारी आईएएस खेमपाल सिंह ने एक-एक करके सभी विकास खंडों के अंतर्गत स्थापित गोशालाओं की समीक्षा की। कहा कि जनपद में एक बृहद गौशाला की अनुमति शासन से प्राप्त हो गयी है। कहा कि यदि कोई पशु पालक दूध लेने के बाद पशु छोड़ता है तो इस पर कार्यवाही करें। तहसील स्तरीय टीम भी निरीक्षण करें। ज्वाइंट मीटिंग सप्ताह में एक बार गोशाला में बैठक करें। पशुओँ के रख रखाव, चारे पानी व भूसे की चर्चा करें। कहा कि प्रत्येक गोशाला में हरा चारा, पानी, भूसा, खली चोकर, उपचार की आवश्यक व्यवस्था हो। कहा कि हर गौशाला के पास चारागाह की जो भूमि है, उसमें नेपियर घास चरी व अन्य हरे चारे की व्यवस्था अवश्य हो। कहा कि गेंहू बुवाई का समय आ गया है। भूसा की खरीद की प्रक्रिया मुख्य चिकित्सा अधिकारी करें। गोदाम में भूसा एकत्र रखा जाए। पशुओं को समय-समय पर नहलाया जाए। सर्वे करा लिया जाए कि कितने पशु संरक्षण केंद्र में आ सकते हैं, उसके अनुसार कार्यवाही करें। उपजिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी रात में भी अचानक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखें। डीएम बीके त्रिपाठी ने कहा कि जिन गोशालाओं का विस्तार हो गया है, अभियान चलाकर उनमें क्षेत्र के छुट्टा बेसहारा पशु को पकड़कर संबंधित गौशाला में संरक्षित किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। गोशालाओं को आत्म निर्भर बनाया जाए। वर्मी कम्पोष्ट, गोबर से कंडे व अन्य आवश्यक उत्पाद भी बनाए जाए। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अवधेश सिंह, अपरजिलाधिकारी भगवान शरण, अपरजिलाधिकारी न्यायिक मायाशंकर यादव, मंशा राम गौतम, एसडीएम धनौरा, नौगांवा, परियोजना निदेशक, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, उपनिदेशक कृषि आदि मौजूद रहे।