प्रक्रिया एक कदम और आगे बढ़ी है। एडीएम ने एसडीएम सदर को बान नदी की पैमाइश कराने को निर्देशत किया है। ग्राम प्रधानों की मौजूदगी में नदी की पैमाइश कराई जाएगी। पैमाइश के बाद अतिक्रमण पर मनरेगा से फावड़ा चलेगा। कानूूनी प्रक्रिया के तहत अवैध कब्जे हटवाएं जाएंगे।
उत्तराखंड के कोटद्वारा की पहाड़ियों से निकलकर बिजनौर होते हुए अमरोहा जनपद की सीमा में बहने वाली बान नदी को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू हो गई है। क्योंकि प्रशासन की अनदेखी के चलते क्षेत्र के लोगों ने नदी का सीना चीरकर फसल उगा डाली है।
अतिक्रमण से नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। अमर उजाला की मुहिम पर प्रशासन नदी बचाने को आगे आया है। सिलसिलेवार खबर प्रकाशित होने से प्रशासन की कार्रवाई प्रतिदिन आगे बढ़ रही है। मंगलवार को अपर जिलाधिकारी महमूद आलम अंसारी ने एसडीएम सदर प्रवीणा को बान नदी की पैमाइश कराने को निर्देशित करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। ग्राम प्रधानों की मौजूदगी में बान नदी की पैमाइश कराई जाएगी।
अतिक्रमण वाले स्थानों को चिह्नित करते हुए निशान बनाए जाएंगे। पैमाइश के बाद मनरेगा से बान नदी की खुदाई कराई जाएगी। अतिक्रमण पर फावड़ा चलेगा।