नौगावां सादात को तहसील का दर्जा मिलने से पहले ही विरोध के शुरू तेज हो गए हैं। एक के बाद एक संगठन विरोध में उतर आया है। बार एसोसिएशन से लेकर दर्जनों गांव के प्रधान गांव के प्रस्ताव के विरोध में खड़े हो गए हैं। राजस्व परिषद में आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं।
वहीं कुछ लोग कोर्ट जाने की तैयारी में लगे हैं। इसी के चलते अब नौगावां सादात तहसील का मामला खटाई में पड़ता नजर आ रहा है क्योंकि काफी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। मानक अनुसार गांवों का चयन नहीं किया गया है।
नौगावां सादात तहसील भवन के निर्माण को लेकर मौलाना जावेद आब्दी और विधायक अशफाक अली खां में खींचतान चल रही है।
जावेद आब्दी शहर में तहसील का भवन बनवाना चाहते हैं तो वहीं विधायक अशफाक अली खां आबादी से बाहर तहसील का भवन बने इसकी वकालत कर रहे हैं। तहसील भवन को लेकर माननीयों के बीच खींचतान चल रही है। विरोध अभी थमा नहीं था कि अब विरोध के शुरू और तेज हो गए हैं।
राजस्व परिषद द्वारा जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसके विरोध में अमरोहा तहसील बार एसोसिएशन उतर आई है। बार एसोसिएसन ने तहसील प्रस्ताव को मानकों के विरोध बताते हुए प्रस्ताव को निरस्त कराने की मांग की है। राजस्व परिषद में आपत्ति दर्ज कराई है।
वहीं अमरोहा तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांव के प्रधान और ग्रामीण तहसील के विरोध में आ गए हैं क्योंकि नौगावां सादात तहसील में अमरोहा तहसील के उन गांवों को शामिल किया गया है जिनक दूरी अमरोहा से सात से आठ किलोमीटर है जबकि गांवों से नौगावां सादात की दूरी बीस से 23 किलोमीटर से अधिक है।
इसमें बुढेरना, धकतोड़ा,मूढ़ा खेड़ा, रतनपुर, रामपुर सफेद, अलीपुर, चमरुवा, कुमखिया, आलमपुरी मजरा कुमखिया, लकड़हट, देहरी खुर्रम, ईसापुर, चकधी का नंगला, नौराहन, सिंकदरपुर, मुनब्बरपुर, कोठी खिदमतपुर, अकबरपुर मजरा करौंदी, मनीमपुर आदि गांव नौगांवा से बीस किलोमीटर की दूर पर हैं जबकि उक्त गांवों की दूरी अमरोहा तहसील से सात से दस किलोमीटर के दायरे में है।
इन प्रधानों का कहना है कि प्रस्ताव जनविरोधी है। क्योंकि शासन का उद्देश्य है कि जनता को सस्ता सुलभ न्याय मिलना चाहिए। उपरोक्त प्रस्ताव से ग्रामवासियों को पहले तहसील अमरोहा होकर नौगावां सादात जाना होगा जो अत्याधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
राजस्व परिषद में आपत्तियां दर्ज कराई जा रही है जिससे नौगावां सादात के तहसील बनने का मामला फिलहाल खटाई में पड़ गया है क्योंकि कुछ लोग तहसील के विरोध में हाईकोर्ट जाने की तैयारी भी कर रहे हैं। एक बार फिर नए सिरे से तहसील का प्रस्ताव तैयार हो सकता है। इसकी संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में अधिकारी कुछ बोलने केे तैयार नहीं हैं।