गजरौला। दहेज में 50 लाख रुपये की मांग पूरी नहीं होने पर शिक्षिका बहू को कमरे में बंधक बना कर उसका उत्पीड़न करने और जान से मारने की कोशिश करने में फंसा ससुर गिरफ्तारी के डर से विदेश भाग गया है। वह कतर में छिप गया है। चार साल में पुलिस उसे गिरफ्तार करने में नाकाम है।
थाना क्षेत्र के गांव मझोला निवासी शिक्षिका निशी की मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव मल्हुपुरा में ससुराल है। निशी की शादी 15 दिसंबर-18 को ब्रह्म सिंह के बेटे अनुराग के साथ की गई। निशी ने 23 सितंबर-19 को ससुर ब्रह्म सिंह सहित ससुराल वाले पांच लोगाें के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया। एफआईआर के मुताबिक दहेज में 50 लाख रुपये की मांग पूरी नहीं ससुराल वाले उसका उत्पीड़न करते थे। उसे रस्सी का फंदा गले में डाल कर जान से मारने की कोशिश की गई। कमरे में बंधक बना कर उसका उत्पीड़न किया गया। उसे धक्का देकर घर से निकाल दिया। वह अपने मायके आ गई। उधर दहेज उत्पीड़न व बहू की जान से मारने की कोशिश में फंसने पर आरोपी ससुर ब्रह्म सिंह कतर भाग गया। रिपोर्ट दर्ज को चार साल होने वाले हैं, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। विदेश में छिपा हुआ है। थानाध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है।
गृह मंत्रालय की इंटेलीजेंस से साधा संपर्क
विदेश में छिपे ब्रह्म सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसएसआई ने सबसे पहले गृह मंत्रालय से मदद मांगी। गृह मंत्रालय की इंटेलीजेंस ब्यूरो असिस्टेंट डायरेक्टर मीनाक्षी गोपाल से विदेश में छिपे आरोपी की यात्रा डिटेल निकलवाई। 12 अक्तूबर-11 तीन अप्रैल23 तक की डिटेल निकलवाने में पता चला कि ब्रह्म सिंह का जे 4409654 पासपोर्ट है। वह नौ मई-19 को फ्लाइट 6 ई 1701 द्वारा दिल्ली एयरपोर्ट से कतर देश के लिए भाग गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए विधिक राय लेने को संयुक्त अभियोजन कार्यालय में 22 जून-23 को प्रार्थना पत्र दिया गया है। विधिक राय मिलने पर उसकी गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विदेश भागे आरोपी को बचाने के लिए विवेचकों ने किया खेल
दहेज उत्पीड़न और जान से मारने की कोशिश करने में फंसे आरोपी को बचाने के लिए विवेचकों ने खूब खेल किया। जिसके चलते दोबारा विवेचना शुरू की गई। मगर पुलिस का तर्क है कि सबसे पहले इसकी विवेचना उमेश चंद्र गुप्ता ने की, मगर उनका स्थानांतरण कर दिया गया। जिसके चलते जांच आगे नहीं बढ़ सकी। कुछ दिनों बाद अपराध निरीक्षक अभितेंद्र सिंह को दी गई। वह जांच के बाद किसी नतीजे पर पहुंचते। इससे पहले ही उनका तबादला हो गया। इस कारण उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। फिलहाल इसकी जांच एसएसआई शौकेंद्र सिंह कर रहे हैं।