अमरोहा। विधान परिषद के मानसून सत्र में एलएलसी डॉ. हरी सिंह ढिल्लो ने शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए। उन्होंने शिक्षकों की सुरक्षा के लिए अलग से एजुकेशन एक्ट लागू करने, माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को टोल टैक्स से छूट देने, प्रधानाचार्य भर्ती में अनुभव और शैक्षणिक उपलब्धियों को महत्व देने तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के संबद्धता विस्तार शुल्क में राहत देने की मांग की।
डॉ. ढिल्लो ने नियम 110 के अंतर्गत कहा कि प्रदेश के यूपी बोर्ड एवं अन्य मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में असामाजिक और अराजक तत्वों के हस्तक्षेप तथा उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन में असुरक्षा का माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चिकित्सकों और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया गया है, उसी तरह शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी एजुकेशन एक्ट बनाया जाना चाहिए। नियम 115 के तहत उन्होंने प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के निजी वाहनों को टोल टैक्स से मुक्त किए जाने की मांग की।
उनका कहना था कि हजारों शिक्षक प्रतिदिन दूर-दराज के विद्यालयों में पढ़ाने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं और नियमित रूप से टोल प्लाजा से गुजरते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में शिक्षकों को टोल टैक्स में छूट देना उनके सम्मान और कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके अलावा डॉ. ढिल्लो ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रस्तावित 2500 प्रधानाचार्य पदों की भर्ती प्रक्रिया में केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन के बजाय अभ्यर्थियों के सेवा अनुभव, पीएचडी तथा अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए भी अतिरिक्त अंक देने की मांग की। उन्होंने नियम 111 के अंतर्गत गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से संबद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के विभिन्न पाठ्यक्रमों के संबद्धता विस्तार शुल्क को पूर्व की तरह 59 हजार रुपये प्रति पाठ्यक्रम निर्धारित करने की भी मांग की। उनका कहना था कि शुल्क वृद्धि से स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, जिसका असर उच्च शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है।