खून के सौदागरों को फंसाने के लिए अफसर जाल बिछाएंगे। जच्चा को चढ़ने वाला खून कहां से आया, इसकी पड़ताल शुरू हो गई है। सीएमओ ने मामले की विभागीय जांच एसीएमओ को सौंपी है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ द्वारा किसी मेडिकल स्टोर से खून लाने की शिकायत की थी।
अधिकारिक सूत्रों की मानें तो जांच अधिकारी ने डाक्टर व स्टाफ को पूछताछ के लिए तलब किया है। जिनसे बातचीत के बाद ही खून के सौदागर का नाम उजागर हो सकेगा।
नौगावां सादात क्षेत्र के गांव खेतापुर निवासी इरफान की पत्नी फरजाना की गत मंगलवार को वारसी हॉस्पिटल में प्रसव के बाद खून चढ़ाते हुए तड़प-तड़पकर मौत हो गई थी, जिस पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा. रामजी वर्मा ने हॉस्पिटल को सील कर दिया था। साथ ही रजिस्ट्रेशन निरस्त कर डाक्टर व स्टाफ पर केस दर्ज कराने के लिए कोतवाली तहरीर भिजवाना बताया था।सवाल उठा था कि महिला को चढ़ाया गया खून कहां से आया। बगैर टेस्ट के उसको किसने चढ़ाया।
सीजर अस्पताल में किसने किया। कहीं खून खराब तो नहीं था। मेडिकल स्टोर या किसी पैथोलॉजी पर तो नहीं बिक रहा था। इसकी तस्दीक के लिए सीएमओ ने नोडल अधिकारी/एसीएमओ को ही जिम्मेदारी सौंप दी है।
विभागीय जांच के लिए उनको नामित कर दिया है। इस पर उन्होंने डाक्टर व स्टाफ को मालूमात के लिए तलब किया है। सच्चाई की तह तक पहुंचने के बाद ही अफसर खून के कारोबारियों को पकड़ने का ताना बाना बुनेगा।
पूरा प्रकरण संज्ञान में है। खून कहां से आया। इसकी विभागीय जांच एसीएमओ को सौंपी गई है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
डा. एसके जैन, सीएमओ