गंगेश्वरी ब्लाक के गांव काई मुस्तकम में जांच करते अधिकारी।
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ढबारसी(अमरोहा)। गंगेश्वरी ब्लाक क्षेत्र के गांव काई मुस्तकम में मनरेगा जॉबकार्डों में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद जिला प्रशासन की निंद्रा टूट गई है। जॉबकार्डों में नाम बदलकर मजदूरी हड़पने के मामले में टीम जांच करने गांव पहुंची। ग्रामीण और जॉबकार्ड धारकों से पूछताछ की। षड्यंत्र के तहत जिन लोगों के नाम पर मजदूरी की रकम ट्रांसफर की गई है, उस नाम का व्यक्ति गांव में नहीं मिला है। टीम ने भी माना की जॉबकार्डों में गड़बड़ी हुई है। फिलहाल टीम द्वारा जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। अब गांव के सभी मनरेगा जॉबकार्डों की जांच होगी। पूरे फर्जीवाड़े में कुछ का फंसना तय माना जा रहा है।
दरअसल गंगेश्वरी ब्लाक की काई मुस्तकम ग्राम पंचायत में मनरेगा जॉबकार्डों में फर्जीवाड़ा हुआ है। ग्राम पंचायत में 363 जॉबकार्ड धारक मजदूर है। मनरेगा के अंतर्गत सैकड़ों मजदूरों ने तालाब, खलिहान, चकरोडों पर मिट्टी कार्य और प्राइमरी स्कूल में 20 जून से 8 जुलाई तक काम किया था। कुछ जॉबकार्ड धारक ने इससे पहले और बाद में मजदूरी की। लेकिन, इन मजदूरों की मजदूरी आज तक उनके खाते में नहीं पहुंची है। मजदूर लखपत, अमरसिंह, राम प्रकाश, होराम और जगपाल ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़ा होने का आरोप लगाया था। षड्यंत्र के तहत जॉबकार्ड में परिवार के सदस्यों नाम बदलकर मजदूरी की रकम दूसरे के खाते में ट्रांसफर करवा दी है। मजदूरों ने फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कराकर मजदूरी के रुपये दिलवाने की मांग की है। कोरोना काल में भुखमरी की कगार पर खड़े मजदूरों की आवाज को अमर उजाला ने प्रमुखता उठाया। ‘मनरेगा जॉबकार्डों में फर्जीवाड़ा, नाम बदलकर हड़पी मजदूरी’ शीर्षक से खबर को प्रकाशित की।
इसके बाद जिला प्रशासन की निंद्रा टूट गई। आनन-फानन में गंगेश्वरी ब्लाक के बीडीओ जाकिर अली, एपीओ ब्रजभान सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी ऋषिपाल सिंह ने काई मुस्तकम पहुंच कर जांच की। जिसमें अधिकतर शिकायतकर्ताओं की शिकायत सही पाई गईं। बीडीओ ने बताया कि शिकायत कर्ताओं के जॉबकार्डों की जांच की गई है। उसके गड़बड़ी मिली है। जिन लोगों के नाम पर मजदूरी की रकम ट्रांसफर की गई है, उनका गांव में नहीं होना पाया गया है। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। अब ग्राम पंचायत के सभी जॉबकार्डों की जांच की जाएगी। इसमें रोजगार सेवक जो बैंक खाता नंबर फीड कराता है, विभागीय अधिकारी उसी पर विश्वास करते हैं। पूरी ग्राम पंचायत के जॉबकार्डों की जांच कर जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।