हसनपुर (अमरोहा)। कोरोना काल में मौसम के तेवर नरम रहे। अप्रैल में भी सुबह शाम मौसम ठंडा ही रहा। इसका असर आम पर पड़ा है। गर्मी अधिक नहीं पड़ने पर आम के पकने में देरी हो गई है। वहीं अभी तक अपना पूरा आकार भी नहीं ले सका है। इस बार आम बाजार में पंद्रह दिन की देरी से ही पहुंचेगा। ऐसे में जून के दूसरे हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता है।
लॉकडाउन में सब कुछ ठप रहा। प्रदूषण में कमी आई। एक्यूआई सामान्य से कम रहा। यही वजह रही कि मंडल के जिलों से उत्तराखंड की पहाड़ियां दिखने लगी। हर साल की तुलना में इस बार अप्रैल में गर्मी कम ही पड़ी। वहीं मई के चौथे हफ्ते में मौसम सख्त हुआ। गर्म हवाएं चली। गर्मी अधिक नहीं पड़ने से आम की फसल प्रभावित हुई है। अभी आम पूरी तरह से आकार नहीं ले पाया है। वहीं आम के पकने में देरी हो रही है। ऐसे में अमरोहा के आम बाजार में देर से आएंगे। जून के दूसरे हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता है। जबकि जून के पहले हफ्ते में हरहाल में आम बाजार में आ जाता है।
- आम की बागबानी को मेहनत के साथ तैयार किया है। इस बार अप्रैल तक सर्दी अधिक पड़ने की वजह से आम के पकने में पंद्रह दिन की देरी है। गत वर्षों में आम जून के पहले सप्ताह में ही बाजार में पहुंच जाता था, लेकिन इस बार आम 15 जून के बाद ही बाजार में पहुंच पाएगा। ----यशपाल सिंह, आम बाग स्वामी। हसनपुर।
- गर्मी अधिक नहीं पड़ने से आम की फसल प्रभावित हुई है। इस बार दस से पंद्रह दिन की देरी हो सकती है। इस बार दूसरे हफ्ते के बाद ही बाजार में आम के पहुंचने की उम्मीद है। - त्रिभुवन कुमार, जिला उद्यान निरीक्षक
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एक नजर आंकड़ों पर
- जिले में 12000 हेक्टेअर भूमि पर आम के बाग हैं
- पिछले साल 2.88 हजार मीट्रिक टन आम की पैदावार हुई थी
- इस बार भी 2.88 हजार मीट्रिक टन आम की पैदावार होने की उम्मीद