अमरोहा। किशोरी के साथ दुष्कर्म के दोषी को कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को देनी होगी।
यह घटना आदमपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई। गांव में एक किसान का परिवार रहता है। किसान के छोटे भाई के घर काई मुस्तकम गांव निवासी नरेंद्र का आना-जाना था। नरेंद्र ने किसान की 17 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया। इससे किशोरी गर्भवती हो गई। 14 अगस्त 2020 की रात नरेंद्र छह माह की गर्भवती किशोरी का गर्भपात कराने उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचा। इस दौरान किशोरी की तबीयत बिगड़ी तो आरोपी उसे अस्पताल में छोड़कर भाग गया। जानकारी मिलते ही किशोरी के परिजन अस्पताल पहुंच गए। मामले में किशोरी के पिता ने नरेंद्र के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
इसके बाद पुलिस ने नरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल, वह जमानत पर जेल से बाहर था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट तृतीय ईश्वर सिंह की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी बसंत सिंह सैनी पैरवी कर रहे थे। मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की। साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने नरेंद्र को दोषी करार दिया और उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
दोषी नरेंद्र का अपराध घोर निंदनीय एवं दुस्साहसिक प्रवृत्ति का है। उसने किशोरी के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। जिससे वह गर्भवती हो गई। दोषी नरेंद्र के विरुद्ध दंड के प्रति उदार रुख अपनाना उचित नहीं होगा। इसलिए, दोषी नरेंद्र को अधिक से अधिक दंड से दंडित किया जाए, ताकि समाज में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार का कृत्य करने का दुस्साहस न कर सके। -
बसंत सिंह सैनी, विशेष लोक अभियोजक
पीड़िता के चाचा के पास दोषी का था आना-जाना
विशेष लोक अभियोजक बसंत सिंह ने बताया कि दोषी नरेंद्र का पीड़िता के चाचा के पास आना-जाना था। जिसका, फायदा उठाकर नरेंद्र ने किशोरी को बहला-फुसला कर उसके साथ दुष्कर्म किया। जिस कारण वह गर्भवती हो गई थी। घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी।
परिजनों ने कराया था किशोरी का गर्भपात
विशेष लोक अभियोजक बसंत सिंह सैनी ने बताया कि दोषी नरेंद्र किशोरी का गर्भपात कराने अस्पताल लेकर गया था। यहां दवाई खिलाने के बाद किशोरी की तबीयत बिगड़ी तो वह उसे अस्पताल में छोड़कर भाग गया था। अस्पताल के डॉक्टर ने मामले की जानकारी किशोरी के परिजनों को दी थी। जिसके बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों को किशोरी का गर्भपात करना पड़ा था।