अमरोहा। जिले में खांसी, जुकाम के साथ टायफाइट ने दस्तक दे दी है। कोरोना और इन्फ्लूएंजा का खतरा मंडरा रहा है। पिछले एक सप्ताह में कोरोना के तीन मरीज मिल चुके हैं। गंभीर रूप से बीमार मरीजों में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। अब तक ऐसे मरीजों के तीमारदारों को प्लेटलेट्स के लिए मेरठ-मुरादाबाद की दौड़ लगानी पड़ती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू होने की कवायद लगभग पूरी हो गई है। सोमवार को मुंबई से अमरोहा पहुंचे इंजीनियर सागर सिंपी ने मशीनों को इंस्टॉट कर दिया है। साथ ही ब्लड बैंक कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। डॉक्टरों ने माने तो लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी होने के साथ पंद्रह दिन में यूनिट शुरू हो जाएगा। इसके बाद मरीजों को यहीं प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और पीआरबीसी की रिपोर्ट मिलने लगेगी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। जनपद में अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट नहीं होने के कारण एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के काम आता है। इसके साथ ही प्लेटलेट्स और प्लाज्मा आदि निकालने की सुविधा नहीं होने से डेंगू आदि के गंभीर मरीजों के तीमारदारों को मुरादाबाद, मेरठ और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। लोगों की सहूलियत को देखते हुए सरकार ने ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया। शासन से मंजूरी मिलने के बाद बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी पूरा हो गया। उम्मीद थी कि जल्द ही स्थापित होने के बाद खून की एक यूनिट से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी (पैक्ड रेड ब्लड सेल) और क्रॉयोप्रेसीपिटेट तैयार किए जा सकेंगे। इससे एक यूनिट खून से चार अलग-अलग मरीजों की जान बचाई जा सकती है। लेकिन बिल्डिंग तैयार होने के करीब छह महीने बाद भी यूनिट शुरू नहीं हो सकी। इसका खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। तीमारदारों को मुरादाबाद, दिल्ली, मेरठ की दौड़ लगानी पड़ रही है। लेकिन अब एक बार फिर मशीनों के इंस्टॉल होने के बाद उम्मीद जगी है कि जल्द यूनिट शुरू हो जाएगी। जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों की भागदौड़ बच सकेगी।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की सभी मशीनें आ गई है। स्टाफ की ट्रेनिंग भी हो चुकी है। सोमवार को मुंबई से पहुंचे इंजीनियर ने सभी मशीनों को इंस्टॉल कर दिया है। मशीनों को चलाने के बारे में जानकारी दी गई है। अब केवल यूनिट के लाइसेंस की प्रक्रिया बची है। उम्मीद है कि पंद्रह दिन के भीतर यूनिट को शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी ब्लड बैंक