गजरौला। व्यावसायिक लाभ के लिए हरेे भरे पेड़ों पर केमिकल डालकर सुखाया जा रहा है। पर्यावरण सचेतक समिति के राष्ट्रीय सचिव संजीव पाल की शिकायत पर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
नगर में रहने वाले पर्यावरण सचेतक समिति के राष्ट्रीय सचिव संजीव पाल ने पिछले दिनों केंद्र सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (वन सुरक्षा प्रभाग) से शिकायत की थी। कहा था कि जिले में सरकारी और गैर सरकारी भूमि पर खड़े हरे भरे पेड़ों कोे काटने वाला गिरोह सक्रिय है। जिसके दो सरगना धनौरा क्षेत्र में रहते हैं।
उनकी वन विभाग और वन निगम के अधिकारी व कर्मचारियों से साठगांठ हैै। जिनसे हरे भरे पेड़ों को कटवाने के लिए उन पर अंक लिखवा लेते हैं। अनुमति मिलने पर साठगांठ कर ठेका ले लेते हैं। जिन पेड़ाें को कटवाने के लिए वन निगम या वन विभाग तैयार नहीं होता, उनकी जड़ में केमिकल डाल देते हैं। जिससे हरे भरे पेड़ सूख जाते हैं। नगर से लेकर ब्रजघाट तक हजारों हरे भरे पेड़ों को इसी तरह सुखा दिया गया है। शहवाजपुर डोर में स्थिति भयावह हैै। उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से इस मामले की जांच कर माफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक से इस संबंध में रिपोर्ट मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
माफिया ने दी थी संजीव पाल को धमकी
गजरौला। दो साल पूर्व रमाबाई आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय से लेकर भानपुर फाटक तक हरे भरे पेड़ों काटने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए वन निगम ने अनुमति भी प्रदान कर दी थी, लेकिन पर्यावरण को बढ़ावा देने वाले डॉ. संजीव पाल, डॉ. यतेंद्र कटारिया समेत कई लोगों नेे डीएम से शिकायत कर पेड़ों को कटने से बचाया था। इस पर धनौरा के कुछ लकड़ी माफिया इस कदर नाराज हुए थे कि उन्होंने संजीव पाल को जान से मारने की धमकी दी थी।