अमरोहा। वक्फ प्रॉपर्टी पर भू-माफिया की निगाहें टिकी हैं। प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की साजिश रची जा रही है, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग रोकथाम में नाकाम साबित हो रहा है। काफी अरसे से सर्वे वक्फ निरीक्षक की तैनाती नहीं होना प्रमुख वजह बताई जा रही है। वक्फ के कई मामले कार्यालय में दर्ज है। विभाग कार्रवाई करने का बहाना कर टरका रहा है। मुतवल्ली भी हैरान और परेशान हैं। ऐसे में यह लोग कलेक्ट्रेट, विकास भवन और तहसील का चक्कर काटने को विवश हैं।
जिले में वक्फ की कुल 2,665 संपत्तियां हैं। इनकी देखरेख वक्फ बोर्ड के जिम्मे है। डीएम के पर्यवेक्षण में जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निगरानी करते हैं। हालांकि सर्वे वक्फ निरीक्षक का पद काफी दिनों से रिक्त है। कुछ दिन पहले संभल के कर्मचारी को संबद्ध किया था, लेकिन ट्रांसफर हो गया। इसके बाद से यहां पर कोई भी सर्वे वक्फ निरीक्षक कार्यरत नहीं है। जनसुनवाई पोर्टल पर प्रत्येक महीने में 10 से 15 शिकायतें आ रही हैं। वक्फ इंतजामिया से जुड़े लोगों का दावा है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मामले का सतही निस्तारण करता है। दरअसल राजस्व अभिलेख में वक्फ का रिकार्ड दर्ज नहीं होने से क्रय विक्रय की आशंका अधिक रहती है। कई वक्फ प्रॉपर्टी ऐसी है जिनका क्रय विक्रय हो चुका है। राजस्व अभिलेख में दर्ज होना चाहिए।
तहसील कर्मचारियों की भूमिका भी है संदिग्ध
अमरोहा। वक्फ प्रॉपर्टी के स्वामित्व के हेरफेर में तहसील कर्मियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। दरअसल तहसील के कर्मचारी और भू-माफिया सांठगांठ से जमीन पर कब्जा करते हैं। कई मामलों में फर्जी प्रमाण पत्र भी संलग्न करने का मामला सामने आया है। लालच के चलते यह लोग राजस्व अभिलेख में दर्ज करने से आनाकानी करते हैं।
केस एक
कोतवाली के समीप एक चर्चित मोहल्ले में वक्फ प्रॉपर्टी का मामला काफी समय से लंबित है। एक पक्ष पर गलत तरीके से रिकार्ड तैयार करने का आरोप है, जबकि दूसरा पक्ष अपने पक्ष में रिकार्ड प्रस्तुत किया है।
केस दो
अतरासी तिराहा के समीप एक वक्फ प्रॉपर्टी पर स्वामित्व को लेकर विवाद भी चर्चा में है। मुतवल्ली शोएब ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में रिकार्ड प्रस्तुत किया है, लेकिन अब तक निर्णय नहीं हो सका है।