भले की सूबे में सरकार बनने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लघु एवं सीमांत किसानों का एक-लाख तक का कर्ज माफ किया हों, लेकिन जिले के अफसरों ने कर्जमाफी में भी खेल कर दिया। जी हां जिन्हें एकल कृषकों को कर्जमाफी का लाभ मिला चाहिए था। उन्हें परिवार मानते हुए ऋण माफी से बाहर कर दिया। जबकि दूसरे जिलों में हरेक किसानों को इसका लाभ दिया जा रहा है। मामला उजागर हुआ तो भाकियू भानू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने शासन को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की। जिसके बाद अफसरों में हड़कंप मच गया। अब जिले के अफसर राजस्व कर्मचारियों की लापरवाही बताकर खुद की गर्दन बचाने में लगे हैं। हालांकि डीएम ने साफ कर दिया है कि वंचित रहे कृषकों को भी ऋण माफी का लाभ दिया जाएगा।
मालूम रहे कि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हो पत्र भेजकर जिले अफसरों की लापरवाही से वंचित रहे करीब डेढ़ हजार किसानों को ऋण माफी का लाभ दिलाने की मांग की थी। बताया कि सरकार ने एकल कृषकों का कर्ज माफ करने के लिए कहा था। लेकिन अफसरों ने नया खेल करते हुए जिले के करीब डेढ़ हजार कृषकों के परिवारों को किसान मानते हुए उन्हें कर्जमाफी से बाहर कर दिया। जबकि मुफ्फरनगर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर, अलीगढ समेत कई जिलों में एकल कृषकों को लाथ दिया गया है। अब ये मामला शासन तक पहुंचा तो जिले के अफसरों में खलबली मच गई है। आनन-फनान में कार्रवाई करते हुए वंचित कृषकों को कर्ज माफी का लाभ देने की बात कर रहे हैं।