जोया रोड स्थित एक बारातघर में गुरुवार को जलधारा आंदोलन की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित जल संसद में वक्ताओं ने कहा कि जल के दुरुपयोग के करण ही आज मनुष्य को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए सरकारी योजनाएं भी जिम्मेदार हैं। नदियों पर बिजली उत्पादन के लिए बांध बनाकर जलधारा को बाधित कर दिया गया। इससे मैदानी क्षेत्रों में जल संकट पैदा हो गया।
स्थिति ये है कि नगर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रो में भी जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बीच मुख्यवक्ता डा. गुरुदीप उप्पल व आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक डा. शाकिर अमरोहवी ने सरकार को नदियों पर बने बांध को खत्म कर वास्तविक जलधारा को बहाल करने की आवाज उठाई। कहा, अगर सरकार जलधारा को बहाल नहीं करती है तो दिल्ली कूच किया जाएगा। इसके लिए बहुत जल्द दिल्ली तक पदयात्रा करने का फैसला हुआ। राष्ट्रीय जल संसद भी दिल्ली में नवंबर में करने का निर्णय लिया गया। इससे पहले लखनऊ, पटना, चंडीगढ और देहरादून, अलीगढ़ में भी कार्यक्रम होंगे।
जल संसद में नगर पालिका चेयरमैन अफ़सर परवेज, सीओ सिटी शील कुमार, कमर नकवी, इकबाल खां, चंदन नकवी, अशोक यादव, इंजिनियर दानिश शमीम, मोहम्मद जौरेज, डॉ बब्लू सिंह, डॉ एस के मिश्रा, आशा आर्य , डा. संयुक्ता चौहान, डॉ वंदना रानी गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किये। अध्यक्षता पूर्व जज फूल सिंह व संचालन मरगूब सिद्दिकी ने किया।
सोत और बान नदी की जलधारा भी फूटे
अमरोहा। जिले की विलुप्त हो चुकी बान नदी और सूख चुकी सोतनदी की जलधारा भी फूटे ऐसे प्रयास भी होने चाहिए। क्योंकि इन प्राचीन नदियों की जमीन पर कब्जे करके इनकी जलधारा बंद कर दी गई है। सोत नदी की खुदाई के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी कंचन वर्मा के जरिए शुरू हुए प्रयास बंद हो चुके हैं। कुछ माफियाओं ने सोतनदी की जमीन को जोया में और मंडी धनौरा रोड से आगे दबा लिया है। इसी के चलते सोतनदी बंद हो चुकी है।
पिछले वर्ष खुदवाई गई नदी भी धीरे-धीरे पाटी जाने लगी है। इससे किसानों के लिए सिंचाई का संकट पैदा हो सकता है।