अमरोहा। डीएम द्वारा कराई गई शुरुआती जांच में राशन वितरण प्रणाली में गड़बड़ी का बड़ा खेल सामने आया है। गहराई से मामले की जांच हो तो, इसमें अधिकारियों और ठेकेदारों की संलिप्तता सामने आ सकती है। फिलहाल डीएम की इस जांच से पूर्ति विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
जिले की राशन वितरण प्रणाली के संबंध में लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद डीएम ने जांच कराई थी। जांच के लिए दो डिप्टी कलक्टरों पुष्करनाथ चौधरी व भगत सिंह को लगाया था। जिसमें दोनों अधिकारियों ने पांच-पांच बिंदुओं पर दस-दस राशन डीलरों से बात की थी। जिसमें खाद्यान्न से जुड़े बड़े घालमेल का मामला सामने आया है। जिले में एक माह में 70 हजार क्विंटल राशन कोटेदारों को वितरण के लिए दिया जाता है।
जांच के दौरान सामने आया कि शासनादेश के अनुसार मिलने वाले राशन में 700 ग्राम वजन के कट्टे का समायोजन नहीं किया जाता है। देखने में यह वजन भले ही कम लग रहा हो, लेकिन इसी वजन के कारण जिले भर में एक माह में 980 क्विंटल राशन कोटेदारों को मिलता ही नही है। जिसकी बाजार में कीमत लगभग 23 लाख रुपये की है। यानी हर माह डीलरों को इतना राशन कम दिया जाता है।
इसमें संबंधित ठेकेदार व अधिकारियों की वजह से जरूरतमंद परिवारों को पूरा राशन नहीं मिल पाता है। जोकि सरकार की मंशा पर पानी फेर रहा है। इतना ही नहीं, कोटेदारों को वन स्टेप डिलीवरी के तहत राशन दुकान पर ही मिलना चाहिए। लेकिन इस व्यवस्था का पालन भी कहीं नहीं हो रहा है। कोटेदारों को स्वयं राशन का उठान करता है। जिससे उनका परिवहन का खर्च बढ़ता है। जांच के बाद डीएम निधि गुप्ता वत्स ने डीएसओ का स्पष्टीकरण तलब किया। लेकिन डीएसओ के जवाब से डीएम संतुष्ट नहीं हुई। लिहाजा उन्होंने डीएसओ का फिर से जवाब तलब कर लिया।
जांच के बाद यह मामला सुर्खियों में आया तो विभाग में खलबली मची है। बताया जाता है कि मामले की ठीक से जांच हो तो इसमें बड़े स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों की संलिप्तता सामने आ सकती है। डीएम ने बताया कि डीएसओ दोबारा स्पष्टीकरण मांगा गया है।