अमरोहा। कभी ग्रामीणों की प्रगति में सहायक बनीं छोइया और मतवाली नदी के निशान सिर्फ सड़क और रेल के पुलों पर ही बाकी हैं। कई स्थानों पर नदी की तलहटी में खेती की जा रही है।
उत्तराखंड के पहाड़ों से तमाम छोटी-छोटी नदियों का पानी जिला बिजनौर के निचले हिस्से में इकट्ठा होता था, जिसे सिलारा कहा जाता है। इससे तमाम जलधाराओं का उद्गम हुआ। इनमें बान, सोत (स्रोत), बगद, मतवाली, छोइया आदि नदियां शामिल थीं। लेकिन पहाड़ों पर डैम बनाकर इनकी जलधाराओं को रोक दिया गया।
सूख चुकी सोत और बान के निशान तो अभी बाकी हैं, लेकिन छोइया और मतवाली नदी के निशान मिट चुके हैं। ये कांकाठेर रेलवे स्टेशन के निकट दोनों तरफ से होकर बहती थीं। रेलवे स्टेशन के पास मतवाली का पुल आज भी है। यहां से आगे चलकर मतवाली नदी बिजौरा गांव के निकट पहुंचकर बगद नदी में मिल जाती थी।
कांकाठेर से बिजौरा तक मतवाली नदी गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है जबकि कांकाठेर से पीछे इसका नामोनिशान तक नहीं बचा है। जबकि, छोइया का वजूद ही नहीं बचा है। नदियों में पानी आना बंद हुआ, तो जमीन पर कब्जे करके खेतीबाड़ी शुरू कर दी गई। नदियों के विलुप्त होने के बाद पचास किलोमीटर के दायरे अब फसल भी उस तरह की नहीं हो पाती तो आज से बीस वर्ष पहले होती थी।
गंगा के नजदीक थीं छोइया, मतवाली
अमरोहा। गंगा का सबसे नजदीकी किनारा अमरोहा से महज तीस किलोमीटर की दूरी पर है। छोइया और मतवाली नदी गंगा के समानांतर बहती थीं। लेकिन, गंगा नदी से इनका मिलन बगद नदी में मिलने के बाद बदायूं के कच्छला के निकट होता था। गजरौला निवासी महकार सिंह बताते हैं कि छोइया और मतवाली में पानी बहना बंद हुआ तो लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए। अब इन नदियों में औद्योगिक कचरा बहता है या इनकी जमीन पर खेती होती है।
अभिलेखों में 20 मीटर तो हकीकत में नाला बनी नदी
अमरोहा(ब्यूरो)। बगद नदी के अस्तित्व के लिए कहीं फैक्ट्रियों का दूषित पानी तो कहीं अवैध कब्जे खतरा बने हुए हैं। संभल और बदायूं जिले में तो नदी की हालत और ज्यादा बदहाल है।
अमरोहा के मंडी धनौरा ब्लॉक के गांव तिगरी कलां से निकलने वाली बगद नदी संभल और बदायूं जिले के लिए कभी जीवनदायिनी थी। अब नदी खुद के अस्तित्व के लिए संघर्ष करती दिख रही है। गजरौला की ओद्यौगिक इकाइयाें का पानी छोड़े जाने से नदी का पानी प्रदूषित होकर तटवर्ती गांवों के लिए खतरा बना हुआ है।
वहीं, गंगेश्वरी ब्लाक के गांव पौरारा अहतमाली से थोड़ा आगे तक नदी नाले के रूप में तब्दील हो गई है। जबकि, राजस्व विभाग के अभिलेखों में रिकार्ड में बगद नदी को करीब 20 मीटर चौड़ी दर्ज होना बताया जा रहा है। संभल जिले के रजपुरा ब्लाक और बदायूं के कछला तक तो नदी का वजूद ही समाप्त होने की बात कही जा रही है।