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इमाम जैनुल आबेदीन ने सादगी के साथ गुजारी अपनी जिंदगी : मौलाना अब्बास

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अमरोहा। इमाम जैनुल आबेदीन की शहादत पर बुधवार रात शबीह-ए-ताबूत बरामद हुआ। शहादत का वाक्या सुनकर अजादार गमगीन हो गए और मातम बरपा किया।
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मोहल्ला मजापोता स्थित इमामबाड़ा बाबुल मुराद में जारी अशरे की छठी मजलिस को खिताब करते हुए दिल्ली से आए मौलाना अब्बास नकवी ने बताया कि इमाम सज्जाद के नाम से पुकारे जाने वाले जैनुल आबेदीन इमाम हुसैन के चहेते बेटे थे। वह चौथे इमाम थे। कर्बला में हुई जंग के बाद इमाम जैनुल आबेदीन को दमिश्क में यजीद के दरबार में ले जाया गया। दुश्मनों ने मदीना लौटने की इजाजत दे दी थी। इसके बाद कुछ लोगों के साथ आपने बेहद सादगी से अपनी पूरी जिंदगी इबादत में गुजार दी। जो दुनिया के सामने बड़ी मिसाल बन गई। लोगों को इमाम हुसैन की शहादत का वाक्या और जुल्म बताने के लिए ही अल्लाह के हुक्म से इमाम जैनुल आबेदीन को कर्बला में जिंदा रखा गया। मदीने में आपकी विलादत हुई और 57 साल की उम्र में आपको जहर देकर शहीद किया गया। शबीह-ए-ताबूत की बरामदगी के बीच अजादारों ने इमाम जैनुल आबेदीन की शहादत को याद कर मातम किया।
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