मोहल्ला घेर करम अली खां में सोमवार रात इमाम अली नकी की यौमे विलादत के सिलसिले में मनकबती महफिल का आयोजन किया गया। शायरों ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन कलाम सुनाकर श्रोताओं की खूब दाद हासिल की।
महफिल की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन व नात-उन-नबी से हुई। मौलाना कौसर मुज्तबा ने कहा कि इमाम अली नकी की जिंदगी समाज को अमन का पैगाम देती है। उन्होंने इमामों की जिदंगी और तालीमात पर अमल जरूरी बताया। जैगम इब्ने शमीम ने कहा, बस पहरहन हयात का रहना था तार-तार, होता अगर न इस पे रफू-ए-अली नकी। कसीम सिरसवी ने यू कहा, बनना है इस हयात में गर मुक्तकी तुम्हें, उस पर चलो जो रास्ता मौला नकी का है।
शानदार अमरोहवी ने ऐसे कहा, हर एक शेर मेरा शानदार होता है, सना नकी की मैं करता हूं इल्तेजाम के साथ। सरफराज गमगीन ने पढ़ा, अली मुश्किल कुशा का तो कही सानी नहीं मिलता, शुजात में, सखावत में, सदाकत में कनाअत में। डॉ. मुबारक अमरोहवी ने पढ़ा, है जरूरी बहुत इश्क-ए-आले नबी, दोस्तों कब्र में रोशनी के लिए।
जिया काजमी ने कहा, मैं पढ़कर कसीदा अलीयुन नकी का, जमाने से खुद को बड़ा कर रहा हूं। ताजदार अमरोहवी ने कहा, कलामे पाक से पूछा कि किस की बात करें, जवाब आया इमामे नकी की बात करें। इनके अलावा नाजिम अमरोहवी, नौशा अमरोहवी, समर मुज्तबा, जमाल फहमी, अशरफ फराज, अरमान हैदर साहिल आदि शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए। संचालन डॉ. लाडले रहबर ने किया। आयोजक शाने मुज्तबा नकवी ने सभी का आभार जताया।