अमरोहा। दहेज हत्या के करीब सात साल पुराने मामले में न्यायालय ने दोषी पति नरेंद्र को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट का फैसला आने के बाद दोषी नरेंद्र को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।
मामला गजरौला थाने से जुड़ा है। डिडौली कोतवाली क्षेत्र के औरंगाबाद निवासी जयप्रकाश ने अपनी बेटी गीता की शादी 28 अप्रैल 2018 को गजरौला क्षेत्र के बारसाबाद निवासी नरेंद्र के साथ की थी। आरोप था कि विवाह के बाद से ही पति और ससुराल पक्ष के अन्य लोग अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर गीता का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न कर रहे थे। घटना के समय गीता करीब आठ माह की गर्भवती थी। 19 अगस्त 2019 को मायके वालों को सूचना मिली कि गीता को जोया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहां पहुंचने पर गीता मृत मिली। इस मामले में स्थानीय स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं होने पर विवाहिता के पिता जयप्रकाश ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर मामले में 18 मार्च 2020 को पति नरेंद्र व अन्य ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई।
बाद में पुलिस ने नरेंद्र को गिरफ्तार कर न्यायायाल में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। फिलहाल वह जमानत पर जेल से बाहर था। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए, जिनमें मृतका के पिता जयप्रकाश, भाई प्रदीप कुमार, चिकित्सक और विवेचक शामिल रहे।
अदालत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेज साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। सोमवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने आरोपी नरेंद्र को दहेज हत्या का दोषी करार दिया। फैसला आने के बाद तुरंत नरेंद्र को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। मंगलवार को अदालत ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई की और दहेज हत्या में दोषी नरेंद्र को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।