अमरोहा। जिले में बढ़ती आग की घटनाओं के बीच अग्निशमन विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर तापमान बढ़ने के साथ आग लगने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं, दूसरी ओर दमकल विभाग सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। जिले में करीब 41 फायर हाइड्रेट स्थापित हैं, लेकिन इनमें से आधे से अधिक या तो खराब हैं या सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार तीन फायर हाइड्रेट सड़कों में दब चुके हैं, पांच पूरी तरह बंद हैं और तीन क्षतिग्रस्त हैं। इसके अलावा करीब आठ हाइड्रेट में पानी का प्रेशर बेहद कम है, जिससे आपात स्थिति में उनका उपयोग मुश्किल हो जाता है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर दमकल कर्मियों को सरकारी नलकूपों से पानी भरकर आग बुझानी पड़ती है।
हसनपुर क्षेत्र की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है, जहां चारों फायर हाइड्रेट खराब पड़े हैं। गजरौला में भी कई हाइड्रेट अतिक्रमण और सड़कों में दबने के कारण बेकार हो चुके हैं। हालांकि, मंडी धनौरा, नौगावां सादात और जोया में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। उझारी में लगा एकमात्र हाइड्रेट भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। विभाग की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं।
स्टाफ की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। हसनपुर, गजरौला और अमरोहा तीन फायर स्टेशनों पर करीब 60 फायरमैन की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 45 ही तैनात हैं। कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं, जिससे आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई प्रभावित होती है। हाल के दिनों में जिले में आग की कई घटनाएं सामने आई हैं। यदि फायर हाइड्रेट की स्थिति में सुधार और स्टाफ की कमी दूर नहीं की गई, तो आने वाले समय में आग की घटनाओं से निपटना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।