अमरोहा के जोया में सोत नदी पर बने मकान
- फोटो : amar ujala
सोतनदी की खुदाई में लाखों रुपया खर्च होने के बाद प्रशासन ने उसे अपने हाल पर छोड़ दिया, नतीजतन नदी में लोगों ने मकान बना लिए। हाल यह है कि, ऐसी ही इमारतों में बैंक की शाखाएं तक संचालित हो रही हैं। तहसील प्रशासन से जन सूचना अधिकार अधिकार अधिनियम से मिली जानकारी से भी इसका खुलासा हो गया है।
जानकारी के मुताबिक, सोतनदी खसरा नंबर 256 में बहती थी, जिस पर आलीशान इमारतें खड़ी हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन आलीशान इमारतों को ढहाएगा। दो साल पहले नदी की खुदाई रोके जाने से अफसरों की साठगांठ का भी अंदेशा जताया जा रहा है।
सोतनदी की खुदाई के लिए अमर उजाला ने 2014 में मुहिम छेड़ी थी। इस मुहिम के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी कंचन वर्मा ने सोतनदी की खुदाई का बीड़ा उठाया था और 14 किलोमीटर तक खुदाई मनरेगा से कराई गई थी। इस पर करीब 45 लाख रुपये खर्च हुए, मगर जिलाधिकारी का तबादला होने के बाद नदी की खुदाई का कार्य अफसरों ने रोक दिया। इसकी मुख्य वजह थी कि जोया में सोतनदी को पाटकर आलीशान इमारतें बना ली गईं हैं और प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
अब मोहल्ला चौधरियान निवासी नाजिम ने अमरोहा तहसील से सोत नदी के बहाव का खसरा नंबर पूछा तो तहसील ने नारंगपुर की ओर से आ रही सोत नदी को खसरा नंबर 256 में बहते हुए बताया, लेकिन इस खसरा 256 पर आलीशान इमारतें खड़ी दिखाई दे रहीं हैं। यहां बैंक और मार्केट भी बने हुए हैं। आरटीआई में मांगी गई जानकारी के बाद भी प्रशासन के अफसर नदी की भूमि खसरा 256 पर किए गए अवैध निर्माण तोड़ना नहीं चाह रहे हैं।