अमरोहा। कोरोना काल में अपनी उपयोगिता बताने वाली होम्योपैथी चिकित्सा की सेवाएं जिले भर में बदहाल हैं। जिला मुख्यालय समेत अन्य जगह कहने को तो होम्योपैथिक अस्पताल हैं, लेकिन न तो अपना भवन है और न ही पर्याप्त स्टाफ है। हालात यह हैं कि छोटे से कमरे में यह अस्पताल संचालित हो रहे हैं। कहा जाए तो आधे-अधूरे संसाधनों के बीच किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
जिले में अमरोहा, गजरौला, जोया, नौगांवा, सदरपुर, कुंदरकी भूड़, मंगरौला व सैदनगली में अस्पताल संचालित हैं। अधिकांश सीएचसी या पीएचसी के एक कमरे में चल रहे हैं। आठ अस्पताल में मात्र पांच पर ही डॉक्टरों की तैनाती है। जिन अस्पतालों में चिकित्सक नहीं हैं, वहां केवल तीन-तीन दिन के रोस्टर के हिसाब से मरीजों को देखा जा रहा है। ऐसे में वहां पहुंचने वाले मरीजों को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है।
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एक कमरे में ही संचालित है ओपीडी व स्टोर
अमरोहा। चौंकाने वाली बात यह है कि जिला मुख्यालय पर भी राजकीय होम्योपैथी अस्पताल का अपना भवन नहीं है। सीएचसी में एक ही कमरे में राजकीय अस्पताल संचालित है। यहां मरीजों तो छोड़िए स्टाफ तक के बैठने तक की व्यवस्था नहीं। जर्जर कमरा व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा है। यहां चिकित्सा अधिकारी व फार्मासिस्ट व चपरासी की तैनाती तो है, लेकिन उनके बैठने तक का इंतजाम नहीं है। छोटे से ही कमरे में डिस्पेंसरी बनी है। जिससे मरीजों को देखने के बाद दवाई दी जाती है। दीवार और छत भी बदहाल है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नमिता रस्तोगी का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। संवाद
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तीन-तीन दिन का रोस्टर बनाकर देखे जाते हैं मरीज
सैदनगली। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक कमरे में होम्योपैथिक अस्पताल संचालित है। चिकित्सक डॉक्टर आसिफ अली केंद्र पर दोपहर 12:30 बजे डॉक्टर आसिफ अली मरीजों को देखते मिले। बताया कि वह सप्ताह में तीन दिन क्षेत्र के कुंदरकी भूड़ गांव के होम्योपैथिक चिकित्सालय में मरीजों को देखते हैं और सप्ताह में तीन दिन सैदनगली के अस्पताल में मरीजों को देखते हैं। अस्पताल में फार्मासिस्ट जावेद आलम और लैब असिस्टेंट सतीश चन्द मौजूद मिले। इस व्यवस्था के चलते दोनों जगह तीन-तीन दिन मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। संवाद
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गंगवार में संचालित हो रहा मंगरौला को होम्योपैथिक अस्पताल
बुरावली। गंगेश्वरी ब्लॉक के गांव मंगरौला में स्थित होम्योपैथिक अस्पताल जर्जर भवन होने की वजह से वर्षों से गांव गंगवार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में संचालित किया जा रहा है। यहां पर होम्योपैथिक चिकित्सक बबीता मंगलवार दोपहर करीब एक बजे मरीजों को देखती मिलीं। यहां फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। संवाद
बना रहता है हादसे का खतरा
जोया। सीएचसी के एक कमरे में होम्योपैथी अस्पताल संचालित है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश की तो तैनाती है, लेकिन अन्य स्टाफ की कमी है। यही नहीं कमरे की हालत बेहद जर्जर है। छत काफी जर्जर है। कई जगह से प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। दीवार भी बदहाल है। होम्योपैथिक के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ योगेश कुमार जोया में तैनात है। चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यहां के फार्मासिस्ट को नौगांवा से अटैच किया गया है। जो तीन दिन जोया तो तीन दिन नौगांवा बैठते हैं। संवाद
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दो अस्पतालों के लिए आया बजट
नौगांवा सादात और रजबपुर के सदरपुर में होम्योपैथिक अस्पताल बनेंगे। अभी तक ये अस्पताल सीएचसी व पीएचसी केंद्राें पर संचालित थे। शासन से दोनों जगह के लिए 30-30 लाख का बजट पास कर दिया गया है। सीएंडडीएस संस्था द्वारा इनका निर्माण कराया जाएगा। फिलहाल नौगांवा का सीएचसी व सदरपुर का रजबपुर पीएचसी में अस्पताल संचालित किया जा रहा है। संवाद
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जिले में सभी होम्योपैथिक अस्पताल सीएचसी व पीएचसी के एक कमरे में ही संचालित हो रहे हैं। सभी पर दवाइयां तो उपलब्ध हैं, लेकिन स्टाफ की कमी है। जिले के 8 अस्पतालों में पांच की तैनाती है। जबकि, तीन फार्मासिस्ट की भी कमी है। भवन व अन्य समस्या को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही इसमें सुधार हो सकता है।
-डॉ. अंशु शर्मा, जिला होम्योपैथिक अधिकारी
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