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हाईकोर्ट बेंच : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ हो रहा सौतेला बर्ताव

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अमरोहा। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर चल आ रहा आंदोलन अब धार पकड़ने लगा है। अलग-अलग जिलों से बेंच की मांग को समय-समय पर धरना, प्रदर्शन व हड़ताल होती रही है। अब फिर से आंदोलन मुखर होने लगा है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग करीब 50 सालों से उठाई जा रही है। इसमें करीब 30 जिले आते हैं और कई मंडल भी शामिल हैं। जन प्रतिनिधियों का अपेक्षित सहयोग व राजनीतिक दलों की उदासीनता के चलते वर्षों से चली आ रही बेंच की मांग आज भी पूरी नहीं हो सकी है। बेंच को लेकर जब भी चर्चा तेजी होती है तो पूरब की राजनीति इसमें आड़े आ जाती है। वह हड़ताल का भय व राजनीतिक दबाव बनाकर आंदोलन को कुंद कर देते हैं।



क्या बोले अधिवक्ता....



पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच न देकर शासन हमेशा से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं से सौतेला व्यवहार करता आ रहा है। इलाहाबाद ही दूरी अधिक होने से अधिवक्ताओं के साथ ही वादकारियों को भारी परेशानी होती है।
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-सत्यपाल सिंह यादव, अध्यक्ष अधिवक्ता कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन

हाईकोर्ट इलाहाबाद की दूरी कुछ जिलों से 600 से 800 किमी तक है। इससे वादकारी न्याय के लिए उच्च न्यायालय नहीं पहुंच पाते हैं। वह आर्थिक तंगी व समय आभाव में न्याय से वंचित रह जाते हैं। सरकार का सस्ता व सुलभ न्याय का सिद्धांत काम नहीं कर पा रहा है।



-सतवीर सिंह चौहान, पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच न होने से गरीब वादकारियों तक न्याय नहीं पहुंच पाता है। वह न्याय के लिए निचले स्तर पर ही जा पाते हैं। तीन दिन की थका देने वाली यात्रा व वहां पर कमरे तक न मिलना उनको बुरी तरह से तोड़ देता है। वह रात रेलवे स्टेशन या रैन बसेरे में गुजरने को मजबूर होते हैं।



-दिनेश वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता

जब महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में हाईकोर्ट की कई-कई बेंच है तो फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट की बेंच देने में सरकार को क्या दिक्कत है, यह समझ से परे है। लखनऊ में जब हाईकोर्ट बेंच है और वहां से इलाहाबाद की दूरी भी कम है मगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बेंच नहीं दी जा रही है। यह सौतलापन है।-नेत्रपाल सिंह, सचिव अधिवक्ता कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन



प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर सभी सरकारी विभागों के मुख्यालय पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। हाईकोर्ट में मुकदमों की अधिकता होने के कारण 20 साल पुराने मुकदमा का निर्णय आज तक नहीं हो पाया है। देर से मिला न्याय नहीं मिलने के बराबर होता है। पाकिस्तान के लाहौर से भी ज्यादा दूरी इलाहाबाद हाइकोर्ट की है। इसमें पैसा और समय दोनों ज्यादा खर्च होता है। जनहित में बेंच की स्थापना पश्चिमी उतर प्रदेश में होनी चाहिए।

-राजेश कुमार राणा, जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व जनपद अमरोहा



हाईकोर्ट बेंच मिलने से वादकारियों को सस्ता व सुलभ न्याय मिल सकेगा। लंबी दूरी व आर्थिक तंगी के चलते गरीब वादकारी इलाहाबाद नहीं जा पाते हैं और उनकी न्याय की उम्मीद धूमिल हाे जाती है।
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-विपिन गोयल, वरिष्ठ अधिवक्ता
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