कृषि विज्ञान केंद्र की एक हेक्टेयर भूमि पर 1.7 करोड़ रुपये से तैयार हाईटेक नर्सरी जल्द शुरू हो सकती है। उस पर बिजली आपूर्ति के लिए बिजली की लाइन खींच गई है। नया ट्रांसफार्मर भी लगा दिया गया है। जिले के सब्जी उत्पादक किसानों को अच्छी नस्ल की सब्जियों की पौधशाला के साथ ही लता वाली फसलों के पौधे तैयार करने की सुविधा मिलेगी।
उद्यान विभाग ने गजरौला के तारापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की एक हेक्टेयर भूमि पर हाईटेक नर्सरी तैयार की है। इसमें सभी जरूरी मशीनों को लगा दिया गया। इस पर 1.7 करोड़ रुपये खर्च हुए है। आचार संहिता लागू होने से एक दिन पहले हाईटेक नर्सरी का उद्घाटन भी कर दिया गया। इसमें बिना भूमि के पौधे तैयार किए जाएंगे। इसके लिए सबसे पहले कोको पिट (नारियल का चूरा), वर्मी कुलाइट और परलाइट का मिक्सर तैयार किया जाएगा। जिसे एक ट्रे में डाला जाएगा। एक ट्रे में 196 छेद होते हैं। स्वचलित मशीन से ट्रे में बीजों को बोया जाएगा। मिक्सर से पौधों को सभी पोषक तत्वों की पूर्ति होगी। पौधे उग आने पर आइसक्रीम की तरह उनको बाहर निकाल लिया जाएगा।
विभाग द्वारा पौध तैयार की जाएगी। इसके अलावा किसान अपने बीज देकर भी पौधशाला तैयार करा सकेंगे। इसके एवज में किसानों से बहुत कम चार्ज लिया जाएगा। जल्द नर्सरी शुरू हो सकती है। क्योंकि अभी तक बिजली नहीं होने के कारण संचालन नहीं किया जा रहा था। अब बिजली की लाइन खींच दी गई है। ट्रांसफार्मर भी लगा दिया गया है। जिससे नर्सरी में लगे उपकरण व मशीनों को चलाया जा सके। जिले के सब्जी उत्पादक किसान गोभी, बैंगन, शिमला मिर्च, टमाटर की पौधशाला तैयार कर सकेंगे। अधिशासी अभियंता नीरज कुमार का कहना है कि हाईटेक नर्सरी के लिए बिजली विभाग ने लाइन खींच दी है। ट्रांसफार्मर भी लग गया है। जल्द ही आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।
किसानों को मिलेंगे अच्छी नस्ल के और स्वस्थ पौधे
गजरौला। हाईटेक नर्सरी में जिस पौधे को जैसा मौसम चाहिए, वैसा मुहैया कराने के लिए मशीन लगी हैं। इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र पर प्रभारी अधिकारी डाॅ. एके मिश्र सहित डाॅ. शीशपाल सिंह उद्यान से जुड़े, अहादी हसन फसल सुरक्षा और डाॅ. अमित तोमर पादप प्रजनन वैज्ञानिक हैं। प्राची पटेल गृह विज्ञान संबंधी वैज्ञानिक हैं। उपरोक्त वैज्ञानिकों की देखरेख में नर्सरी में अच्छी नस्ल के पौधे तैयार किए जाएंगे। डॉ. एके मिश्र का कहना है कि जल्द ही नर्सरी के शुरू होने की उम्मीद है। यह नर्सरी सब्जी उत्पादक किसानों की जिंदगी में खासा बदलाव लाएगी।