अमरोहा। भले ही स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी व्यवस्था मुकम्मल होने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत बिल्कुल जुदा है। हेपेटाइटिस सी के मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसकी मुख्य वजह ये है कि सैंपल लेने के 50 दिन बाद जांच रिपोर्ट मिल रही है। ऐसे में तमाम मरीज दर्द से कराह रहे हैं। वहीं डॉक्टरों ने निजी लैब की रिपोर्ट के आधार पर इलाज करने से इंकार कर दिया है। जबकि मेरठ की लैब में भेजी जा रहे सैंपल की जांच रिपोर्ट मिलने में करीब पचास दिन का लंबा समय लग रहा है। ऐसे में जनपद के करीब ढाई सौ सैंपल मेरठ की लैब में फंसे हुए हैं।
जिले में हेपेटाइटिस 4 हजार से अधिक मरीज हैं। जबकि लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीमारी से संबंधित लक्षण वाले करीब दस से बारह मरीज रोजाना जांच कराने पहुंच रहे हैं। लेकिन जिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं होने के कारण सैंपल मेरठ लैब भेजने पड़ रहे हैं। हालात ये है कि यहां से रिपोर्ट मिलने में करीब 45 से 50 दिन का समय लग रहा है। जिस कारण मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। सीएमओ डॉ. राजीव सिंघल ने बताया कि हेपेटाइटिस-सी लिवर से संबंधित एक वायरल इंफेक्शन है। इससे कई बार लिवर को बहुत ही गंभीर नुकसान पहुंचता है। चिकित्सकों के मुताबिक अनदेखी पर लिवर फेलियर या कैंसर तक की नौबत आ जाती है, फिर मरीज की जान पर बन आती है। यह बीमारी इसलिए बेहद खतरनाक मानी जाती है क्योंकि आधे से ज्यादा संक्रमित लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें इसके लक्षण या तो दिखाई नहीं देते हैं या फिर सामने आने में ही दस साल तक लग जाते हैं। इसलिए चिकित्सक समय-समय पर रक्त की जांच कराने का सुझाव देते हैं।
ऐसे फैलता है संक्रमण
सीएमओ के मुताबिक हेपेटाइटिस सी का संक्रमण तब फैलता है जब वायरस खून को संक्रमित कर फैलना शुरू कर देता है। इस वायरस के सात रूप हैं और सातों के 67 प्रकार हैं। मरीज को कौन सी दवा देनी है या इलाज का तरीका क्या होगा, यह वायरस के रूप पर निर्भर करता है। जिला अस्पताल में अब दवाएं मौजूद हैं। यहां इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है। केवल जांच रिपोर्ट आने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। इसकी वजह ये है कि मेरठ लैब में लोड अधिक हैं।
ये हैं काला पीलिया के लक्षण
लगातार बुखार होना।
लगातार त्वचा और आंखों में पीलापन रहना।
थकान रहना।
भूख नहीं लगना।
ज्यादा उल्टी आना।
वजन कम होना और पेट में दर्द रहना।
ऐसे बरते एहतियात
यदि किसी परिवार का सदस्य हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमित है तो उन्हें बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसका झूठा खाना भी नहीं खाना चाहिए। चिकित्सक के मुताबिक उसके कपड़े, टूथ ब्रुश, बर्तन को अलग कर देना चाहिए।