स्वास्थ्य विभाग की संगिनी भर्ती में वसूली का खेल हुआ है। लाखों के वारे न्यारे हुए हैं। एक-एक पद के लिए डेढ़ से दो लाख रुपए तक वसूले गए हैं। दो आशाओं ने एसीएमओ एनआरएचएम के सामने पेश होकर पूरे मामले की कलई खोली है। चिकित्साधीक्षक पर रुपए लेने के आरोप लगाए गए हैं। नियुक्ति न होने पर कुछ रुपए वापस करने तो कुछ अभी नहीं देने की बात कही है। एसीएमओ ने जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
एनआरएचएम के तहत प्रत्येक ब्लॉक में संगिनी की नियुक्ति हुई है। 20 आशाओं पर एक संगिनी की तैनाती की गई है। आशाओं में से ही उनका चयन किया गया है। इन्हें प्रत्येक माह मानदेय व विजिट पर 200 रुपए उपलब्ध कराए जाएंगे।
अमरोहा ब्लॉक में आठ पदों पर संगिनी का साक्षात्कार हुआ था, जिसमें भर्ती के नाम पर जमकर वसूली की गई है। इसका खुलासा सोमवार को उस समय हुआ जब आशा बबीता और पुष्पा ने दफ्तर में बैठे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.रामजी वर्मा के सामने रुपए वसूली का चिट्ठा खोला।
दोनों ने आरोप लगाया कि अमरोहा के अस्पताल के चिकित्साधीक्षक ने उनसे डेढ़-डेढ़ लाख रुपए नियुक्ति कराने के नाम डपर वसूले थे। काम नहीं होने पर उन्होंने आधे से अधिक रुपए वापस कर दिए हैं, शेष रुपये नहीं दे रहे हैं। कभी प्रशासनिक अधिकारियों तो कभी राज नेताओं का प्रेशर बताकर काम कराने से मना कर दिया। इस पर एसीएमओ ने उनको कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए वापस भेज दिया।
फर्जी डिग्रियों के सहारे बन गईं हैं संगिनी
एसीएमओ के सामने जिन आशाओं ने वसूली की पोल खोली, उन्होंने ही संगिनी पदों पर चयनित कई महिलाओं की डिग्रियों को फर्जी होने का दावा किया है। आशाओं के मुताबिक रुपए लेकर संगिनी पद पर महिलाओं का चयन हुआ है। जिन महिलाओं को ठीक तरह लिखना भी नहीं आता, उनको संगिनी बनाया है। इनमें से कई की डिग्रियां फर्जी हैं। अन्य प्रमाण पत्र भी फर्जी ढंग से लगाए गए हैं। जांच की गई तो पूरी कलई खुलकर सामने आ जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं के चहेतों का चयन
एसीएमओ के सामने शिकायतकर्ताओं ने बताया कि पहले तो चयन के लिए रुपये ले लिए गए। बाद में उनसे कहा गया कि बड़े अधिकारियों और नेताओं का बड़ा प्रेशर है। इसलिए उनका चयन नहीं हो सकता है। इसके स्थान पर अधिकारियों और नेताओं के चहेतों का चयन किया गया है। इतना कहने के बाद उनके कुछ पैसे वापस कर दिए गए। शेष पैसे अब नहीं दिए जा रहे हैं।
रुपए वसूली का मामला बेहद गंभीर है। अगर ऐसा कुछ हुआ है तो जांच कराकर संबंधित चिकित्साधीक्षक पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी को बख्शा नहीं जाएगा। डा.एसके जैन, सीएमओ