मोहल्ला खंकरवाला कुआं पर एक शाम वीर शहीदों के नाम से मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। मुशायरा की सदारत बदर कुरैशी ने की, जबकि कन्वीनर शायर जमाल हसनपुरी रहे। मुशायरे की शुरुआत समाजसेवी इख्तेदार उल्ला खान ने की।
रविवार रात आयोजित मुशायरे में उत्तराखंड से आए अलीम वाजिद ने पढ़ा, अपनी मिट्टी पर जो कुर्बान नहीं हो सकता वो कभी सच्चा मुसलमान नहीं हो सकता। जमाल हसनपुरी ने कहा, न बांग्लादेश रखते हैं न पाकिस्तान रखते हैं हम अपने दिल में बस नक्शा-ए- हिंदुस्तान रखते हैं। निखत मुरादाबादी ने कहा कि नजर से नजर धीरे-धीरे वह करने लगे दिल में घर धीरे-धीरे। वकार फराजी ने कहा, मेरी फितरत में ही बेवफाई नहीं तेरी तस्वीर अब तक जलाई नहीं।
अरकम खान ने कहा कि आज में समझा हूं मुझसे किस कदर वो दूर है। गैर की मेहंदी लगी है, गैर का सिंदूर है। इस मौके पर सुलेमान फराज, साजिद हसनपुरी, शमशुल कमर शम्स, मसरूर हंसनपुरी, आरिफ अल्वी आदि ने अपने कलाम पढ़े। संचालन गुलजार जिगर ने किया। सभी शायरों ने अवाम से खूब वाह वाही लूटी। इससे पहले डॉक्टर अफसर अली, चमन अंसारी, अमन चौधरी ने शमा रोशन की। यहां युसूफ कुरैशी, अलमान खान, जावेद जरताब, नौशाद चौधरी, जैनुल आबेदीन, खालिद अंसारी रहे।