प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी योजना कर्जमाफी में हजारों पात्र किसानों को अपात्र दिखाकर ऋण माफी से वंचित करने वाले कृषि विभाग ने एक बार फिर चौंकाने वाला कारनामा कर दिया है। 12 फरवरी को हसनपुर और नौगावां सादात थाना क्षेत्र में हल्की बारिश के साथ ओले भी गिरे। गेहूं और सरसों की फसल को बड़ा नुकसान हुआ। लेकिन शासन ने ओलावृष्टि पर मांगी रिपोर्ट में कृषि अधिकारियों ने बारिश दिखाते हुए नुकसान होने से इंकार कर दिया है।
अब किसानों को ओलावृष्टि का मुआवजा नहीं मिलेगा। कृषि विभाग द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की भनक लगने के बाद किसान संगठनों में उबाल आ गया है। किसानों ने कृषि विभाग के खिलाफ आरपार की लड़ाई के लिए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
पिछले सोमवार को आसमान से हल्की बारिश के साथ आसमान से बरसे ओले ने फसलों पर जमकर कहर बरपाया। हसनपुर व नौगावां सादात क्षेत्र में गेहूं व सरसों की फसल पर ओले की मार पड़ी। तमाम फसल बर्बाद हो गई। जबकि गजरौला, अमरोहा और धनौरा और जोया क्षेत्र में बारिश हुई।
प्रदेश के कई जिलों में हुई ओलावृष्टि के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला अधिकारियों को ओलावृष्टि से हुई नुकसान की रिपोर्ट मांगी। इतना ही नहीं ओलावृष्टि से हुई फसल बर्बादी पर मरहम लगाने के लिए 50 करोड़ की धनराशि भी आवंटित कर दी थी। जिसके बाद डीएम नवनीत सिंह चहल के निर्देश पर कृषि विभाग ने जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। लेकिन, कृषि विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट में ओलावृष्टि की मार झेले रहे कृषकों का दम ही घोट दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिले में ओलावृष्टि हुई ही नहीं। नौगावां सादात क्षेत्र में गेहूं के दाने के बराबर मोटा ओला गिरा था, जिसके फसलों को नुकसान ही हो सकता है।