नौगांवा सादात(अमरोहा)। पिटाई से घायल शहिद को अगर समय से इलाज मिल जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। पहले तो शाहिद बारह घंटे तक जंगल में पड़े हुए तड़पते रहे। इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने भी लापरवाही बरती। अगर परिजन घटनास्थल से थाने की बजाय शाहिद को अस्पताल ले गए होते तो उन्हें समय से उपचार मिल सकता था। क्योंकि पिटाई से घायल होने के बाद रात भर शाहिद नौगांवा सादात के कासमपुर मेव गांव के जंगल में पड़े रहे। बृहस्पतिवार की सुबह स्थानीय लोग खेतों पर पहुंचे तो उन्होंने शाहिद को पड़ा देखा। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस या एंबुलेंस को बुलाकर शाहिद को अस्पताल में भर्ती नहीं कराया। शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि शाहिद को लगीं अंदरूनी चोट गंभीर हो सकती हैं। ग्रामीणों उनके परिजनों का आने का इंतजार करते रहे। करीब दस बजे परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और इलाज करने की बजाय शाहिद को थाने ले गए। शाहिद के रिश्ते के मामा सगीर ने बताया कि थाना पहुंचने के बाद पुलिस ने शाहिद के बयान दर्ज किए। इसके बाद कर्मचारियों ने अस्पताल के लिए चिट्ठी मजरूबी काटकर दी। जिसके बाद परिजन शाहिद को लेकर अस्पताल जाने लगे। लेकिन रास्ते में मौत हो गई। जिस कारण समय से इलाज नहीं मिलने पर शाहिद की मौत हो गई। अगर शुरुआत में ही ग्रामीणों या परिजनों ने सतर्कता बरती होती तो शायद शाहिद जिंदा होते। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट हो सकेंगा कि शाहिद की मौत कैसे हुई।