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सेहरा बांधकर निकला था, कफन में लौटा

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अमरोहा। दुष्यंत के परिवार को जिस घड़ी का इंतजार था, वह घड़ी आ गई थी। परिवार में हफ्तेभर से दुष्यंत की बरात की तैयारी चल रही थी। सोमवार हंसता खेलता दुष्यंत सेहरा बांधकर दूल्हे के रूप में घर से बरेली के लिए निकला था। मंगलवार शाम वह कफन में लिपटकर घर पहुंचा। हंसमुख दुष्यंत ने ऐसा कदम क्यों उठाया... परिवार और गांववाले आश्चर्य जताते रहे। हर किसी आंखों के सामने सेहरा सजा उसका चेहरा घूम रहा था।
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सैदनगली थानाक्षेत्र के गांव कुंआडाली निवासी किसान श्यामदेवी गिरी के परिवार को सालभर से दुष्यंत की शादी के दिन का इंतजार था। शादी को लेकर दुष्यंत के भाई बहनों ने सपने संजोए थे। दुष्यंत की शादी अचानक तय नहीं हुई थी। परिजनों के मुताबिक करीब सालभर पहले दुष्यंत का रिश्ता आशा के साथ तय हुआ था। सोमवार को विधि विधान और रस्मो रिवाज के साथ दुष्यंत दूल्हे के रूप में सज-धजकर तैयार होकर दुल्हन लेने रवाना हुआ। दुल्हन आशा के गांव में बरात की आवभगत हुई। सोमवार शाम बरात दुल्हन को लेकर वापस लौटने लगी। घर से दूल्हा बनकर निकले दुष्यंत का शव मंगलवार शाम पहुंची। मौसेरे भाई राजू गिरी ने बताया कि बरात में भी दुष्यंत काफी खुश था। उसके चेहरे पर किसी तरह का कोई तनाव नहीं दिखा। उसने ऐसा क्यों किया, ये किसी को समझ में नहीं आ रहा है। कुछ ऐसा दुष्यंत के भाई शिवयंत का भी कहना था। गांववाले भी दुष्यंत केे इस कदम से आश्चर्यचकित हैं।
दूल्हे के इंतजार में साढ़े तीन घंटे बैठी रही दुल्हन
उझारी। बरेली के गांव पितकपुर से सोमवार की शाम दुल्हन के साथ बरात विदा कर दी गई। दूल्हा दुष्यंत दुल्हन आशा के साथ स्कार्पियो में सवार था। उसके साथ भाई शिवयंत, ताऊ का बेटा आदेश, रिश्ते के दो वीडियोग्राफर भी थे। कार आदेश चला रहा था। रात साढ़े नौ बजे सभी टीएमयू के पास पहुंचे। जहां एक ढाबे पर रुके। इसके बाद दुष्यंत टायलेट करने चला गया। काफी देर तक वह नहीं लौटा तो भाई ने तलाश शुरू की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। करीब एक बजे सभी बिना दुष्यंत के कुंआडाली के लिए रवाना हो गए। इस दौरान करीब साढ़े तीन घंटे तक आशा कार में बैठी दुष्यंत का इंतजार करती रही।
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चार साल से मेरठ के पेट्रोलपंप पर था सेल्समैन
उझारी। छह भाई बहनों में दुष्यंत सबसे बड़ा था। स्नातक तक की पढ़ाई करने वाला दुष्यंत पिछले चार साल से मेरठ के एक पेट्रोल पंप सेल्समैन का काम करता था। इससे पहले उसने रेलवे में नौकरी के लिए कई आवेदन किए थे।
जिसको जो खाना है खिलाओ... मैं टायलेट करके आता हूं
उझारी। टीएमयू के सामने ढाबे पर रुकने के बाद दुष्यंत ने अपना पर्स भाई शिवयंत को दे दिया था। कहा, जिसको जो खाना है खिलाओ... खाने का आर्डर दे दो... मैं टायलेट करके आता हूं। अपनी भाभी के लिए कार में चाय पहुंचा दो।
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