संभल-गजरौला रेल लाइन की मंजूरी पर अब तक संभल में मिठाइयां बंटती रहीं हैं। भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह सैनी रेल लाइन मंजूर कराने का श्रेय लेते रहे हैं पर हकीकत कुछ और निकली।
रेल राज्यमंत्री राजेन गोहांई की ओर से शुक्रवार को राज्यसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक संभल-गजरौला रेल मार्ग के निर्माण को सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। हां, एक बार यह रेल परियोजना पूंजी निवेश के लिए तैयार की गई उन तमाम परियोजनाओं में शामिल की गई थी, जिनमें राज्य सरकारों और स्टेक होल्डरों के माध्यम से संयुक्त उद्यम की श्रेणी में लेकर निवेश कराया जाना था लेकिन घाटे की परियोजना की वजह से कोई निवेशक इस क्षेत्र में रेल लाइन के लिए न तो आकर्षित हुआ और न ही भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने रुचि दिखाई।
भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह सैनी के कार्यकाल में वर्ष 2017-18 में 43 किलोमीटर लंबे संभल- गजरौला रेल मार्ग के निर्माण का काम पूंजी निवेश कार्यक्रम के तहत चयनित परियोजनाओं में एक था। इसके लिए रेल मंत्रालय ने सर्वेक्षण की मंजूरी दी और सर्वेक्षण के लिए बजट जारी किया था। लेकिन यहां प्रचार यह किया गया कि रेल लाइन मंजूर हो गई। असल में ऐसा नहीं था। सिर्फ निजी निवेश की परियोजनाओं में इसे लिया गया था। 562.83 करोड़ के निवेश की जरूरत का आंकलन किया गया लेकिन इस निवेश के लिए न तो सरकार तैयार हुई और न ही निवेशकर्ता। न ही राज्य सरकार ने कोई रुचि दिखाई। संभल-गजरौला रेल परियोजना अधर में अटक गई। अब इस रेल लाइन को कौन बनवाएगा? कब इसे मंजूरी मिलेगी। कब इस पर काम शुरू होगा? यह सभी सवाल जनता की ओर से उठाए जा रहे हैं। जवाब जिम्मेदारों के साथ-साथ सरकार को भी देना पड़ेगा। हो सकता है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा बन जाए।