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अफसरों के गांव ही बदहाल तो दूसरों का क्या हाल 

Wed, 27 Apr 2016 12:46 AM IST
प्रदीप कुमार/अमर उजाला अमरोहा
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सड़क - फोटो : pilibhit, beureu
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 आला अफसरों के गोद लेने के बाद भी उनके गांवों के लोगों की तकदीर नहीं बदल सकी। कमिश्नर का गांव औरंगाबाद हो, डीएम का गोद लिया गांव मखदूमपुर या सीडीओ का गांव अल्लीपुर खादर सभी के हाल एक से हैं। अफसरों के गोद लेने से गांव तो वीआईपी हो गए, मगर सुविधाएं निचले दर्जे की ही हैं। नतीजतन कहीं स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं तो कहीं सफाई व्यवस्था और अन्य शासकीय योजनाओं का हाल बुरा है। 
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नौगावां सादात क्षेत्र का गांव मखदूमपुर डीएम ने गोद लिया है, लेकिन गांव में गंदगी पसरी हुई है।  प्राथमिक विद्यालय के पास गंदगी का अंबार लगा हुुुआ है, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी बुराहाल है।

 2600 की आबादी पर मात्र दो सफाई कर्मचारी तैनात हैं और गांव में तीन बच्चे कुपोषित हैं। ग्राम प्रधान मोहम्मद जावेद का कहना है कि गांव में सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। गांव के विकास के लिए स्पेशल फंड की व्यवस्था की जाए, तभी गांव से कुपोषण मिट सकता है। 
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ग्रामीण बयां कर रहे गांव की बदहाली
जोया ब्लाक क्षेत्र का गांव औरंगाबाद कमिश्नर सुभाषचंद्र शर्मा ने गोद लिया है। गांव में तीन बच्चे कुपोषित हैं। मूलभूत सुविधाओं का भी गांव में अभाव है। गांव के रास्ते बदहाल हैं, सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। अमर उजाला की टीम जब गांव में पहुंची तो अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई। ग्रामीणों ने खुद गांव की बदहाली को बयां किया। ग्रामीण नूरहसन  का कहना है कि कहने को तो गांव कमिश्नर ने गोद लिया हुआ है, लेकिन गांव में सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है।

गांव में विद्युत लाइन खस्ताहाल है। ग्रामीण जयपाल सिंह का कहना है कि गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, बीमार होने पर पाकबाड़ा या फिर अमरोहा जाना पड़ता है। पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं, रास्ते भी बदहाल हैं। ग्रामीण संजय कुमार का कहना है कि गांव में बैंक की सुविधा नहीं है।

इंटर कालेज भी गांव में नहीं है। वहीं सीमा देवी का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के बिना सुविधा शुल्क दिए बैंकों में खाते नहीं खुले रहे हैं। स्कूल को जाने वाले रास्तें पर गदंगी पसरी हुई है। ग्राम प्रधान नजरुद्दीन का कहना है कि गांव के लिए अलग से फंड की व्यवस्था की जाए।

क्या कहते हैं अफसर 
कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार आ रहा है। गांवों से कुपोषण मिटाने के लिए व्यापक रूप से अभियान चलाया गया है। नियमित रूप से बच्चों का वजन चेक कराया जा रहा है। टीकाकरण, पोषाहार वितरण पर नजर रखी जा रही है। गांव में जो गंदगी है, उसे दूर कराया जा रहा है। मूलभूत सुविधाओं में सुधार का प्रयास जारी है। 
- वेद प्रकाश जिलाधिकारी अमरोहा 

बड़ा गांव होने के कारण बच्चे कुपोषित
अल्लीपुर खादर बड़ा गांव होने के कारण आठ बच्चे कुपोषित हैं, कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा रहा है। गांव की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराया जा रहा है। गांव का दौरा कर सफाई व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। 
-शिव कुमार मिश्र, मुख्य विकास अधिकारी

सीडीओ के गांव में आठ बच्चे कुपोषित
हसनपुर/रूखालू। जिले में अफसरों के गोद लिए गांवों में भी सरकारी योजनाओं का ठीक से क्रियांवयन नहीं हो पा रहा है, नतीजतन लोगों के जीवन में सुधार नहीं आ पा रहा है। सीडीओ के गोद लिए गांव अल्लीपुर खादर का भी यही हाल है। एक साल पहले गोद लिए गांव में आठ बच्चे अभी भी कुपोषित हैं। गांव की साफ-सफाई व्यवस्था भी बदहाल है, नियमित सफाई नहीं होने से मच्छरों का प्रकोप है।

करीब एक साल पहले सीडीओ अमरोहा ने हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव अल्लीपुर खादु को गोद लिया था। यह गांव लोहिया योजना में भी चयनित है, मगर गांव में कुपोषण के प्रति जागरूक करने के कार्यक्रम के अलावा ज्यादा कुछ नहीं हो पाया। अभी भी गांव में आठ बच्चे कुपोषित हैं।

ग्रामीण बनारसी का कहना है कि गांव में नियमित रूप से सफाई नहीं होती। बल्लू का कहना है कि कई लोगों को इंदिरा आवास नहीं मिल पाए हैं। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्री रीनू देवी ने बताया कि, आठ बच्चे कुपोषित हैं। बच्चों को पुष्टाहार का वितरण समय से किया जाता है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं ग्राम प्रधान अनिल ने बताया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कराई जाती है। जहां हैंडपंप गंदगी में आ गए हैं, वहां पर भी सफाई कराई जाएगी। 
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