अमरोहा। नाबालिग का अपहरण करके दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए स्कूल बस परिचालक को दोषी ठहराया है। मामले में दोषी परिचालक को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 71 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी जमानत पर जेल से बाहर था। उसे कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया है।
यह घटना गजरौला की है। यहां पर रहने वाले कारोबारी की बेटी एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। 19 मई 2015 को स्कूल से आने के बाद शाम को वह अचानक लापता हो गई। परिजनों ने उसे काफी तलाश किया था, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल सका था। 20 मई की रात को छात्रा अपने घर पहुंची और परिजनों को आपबीती सुनाई थी। कहा कि स्कूल बस का परिचालक राजेश निवासी सददुल्लापुर अपहरण करके चंदौसी में अपनी बहन के घर ले गया था। जहां उसने छात्रा से दुष्कर्म किया। पीड़िता के पिता की तहरीर पर पुलिस ने राजेश के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था। फिलहाल वह जमानत पर जेल से बाहर था। यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष पोक्सो एक्ट) शंकर लाल की अदालत में विचाराधीन था। गुरुवार को न्यायालय ने मामले में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार गर्ग ने जोरदार पैरवी करते हुए आरोपी को सख्त से सख्त सजा की मांग की। इसके बाद न्यायालय ने लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा-4 पोक्सो एक्ट के तहत राजेश को दोषी करार दिया। कोर्ट ने राजेश को दोषी मानते हुए दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 71 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जहां से उसे कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।