अमरोहा। गजरौला के सीलिंग प्रकरण में नगर पालिका और तहसील प्रशासन में हड़कंप मचा है। लेखपाल सस्पेंड के बाद तहसीलदार जांच के घेरे में हैं। उन्हें रिकार्ड के साथ मुख्यालय पर तलब किया गया है। हालांकि अफसर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। अधिकारी किसानों के आंदोलन में उलझे रहे। जिसके चलते शुक्रवार को मामले में कोई खास कार्रवाई नहीं कर सके हैं। स्पष्ट है कि निस्पक्ष जांच हुई तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। इसमें सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच शह मात का खेल चल रहा है। प्रशासन भी फूंक फूंक कर कदम उठा रहा है। अब तक लेखपाल और दो नगर पालिका सहित तीन को निलंबित किया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गजरौला में सीलिंग की भूमि में बंदरबांट का मामला सामने आया है। डीएम उमेश मिश्र ने मामले की जांच के लिए एडीएम वित्त और राजस्व विनय कुमार सिंह को नामित किया है। उनसे मामले की रिपोर्ट तलब किया है। हालांकि किसानों के आंदोलन को देखते हुए शुक्रवार को जांच प्रक्रिया शुरु नही हो सकी। फिलहाल लेखपाल निलंबित कर दिया गया है। वहीं नगर पालिका ने भी दो कर्मचरियों को सस्पेंड किए गए हैं। इस बीच एसडीएम विवेक यादव का स्थानांतरण हो गया है। इस पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल उन्होंने प्लाटिंग करने वालों पर शिकंजा कसा था। इससे सत्ताधारी दल के कुछ नेता भी जद में आने लगे। हालांकि सब कुछ जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा। प्लाटिंग करने वालों के ताल्लुकात सत्ताधारी दल के नेताओं से गहरें हैं।