सत्याग्रह एक्सप्रेस ट्रेन में टीटीई द्वारा बिहार के मजदूर को पकड़ने और उससे कूदकर घायल हुईं मां-बेटी के प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। जीआरपी व आरपीएफ से आला अफसरों ने घटनाक्रम की जानकारी ली। स्टेशन अधीक्षक से भी पूछा गया कि पूरा मामला क्या है। उधर जीआरपी को मामले में कार्रवाई के लिए मजदूर की तहरीर का इंतजार है।
टीटीई द्वारा मजदूर को पकड़े जाने पर उसकी पत्नी व सास कूदने के कारण घायल हो गई थीं। इस बीच बेटी और बेटा भी स्टेशन पर उतर गए। वह काफी देर गुहार लगाते रहे कि उनके पापा को छोड़ दिया जाए, मगर किसी का दिल नहीं पसीजा। हैरत की बात तो यह रही कि पीड़ित मजदूर को आरपीएफ के एक दरोगा ने अपनी पीड़ा भी नहीं सुनाने दी।
दहशत में ट्रेन से कूद कर घायल हुईं मां-बेटी के बयान दर्ज करने की जरूरत नहीं समझी। अब मामला उछला तो आरपीएफ सक्रिय हुई। दरोगा ने पीड़ित मजदूर जितेंद्र को फोन किया। कहा कि वह उसकी पत्नी और सास का बयान दर्ज करेंगे। दरोगा ने बताया कि घटना के दिन घायल मां-बेटी के बयान दर्ज नहीं किए गए थे। इसलिए एक दो दिन में वहीं जाएंगे।
टीटीई द्वारा बिहार के मजदूर को पकड़े जाने पर दहशत में कूदने के कारण घायल हुईं मां-बेटी की हालत में सुधार नहीं है। शुक्रवार को गजरौला से ले जाने के बाद पीड़ित ने उनको हरियाणा में अपने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। पहले दिन उनके उपचार पर आठ हजार रुपये खर्च हो गए। जितेंद्र का कहना है कि उस पर रुपयों का इंतजाम नहीं था। उसने उधार लेकर डॉक्टर को दिए। घायल मां-बेटी अभी कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रहेंगी।