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गजरौला: टीटीई की डर से चलती ट्रेन से कूदी थी मां-बेटी, उच्च स्तरीय जांच शुरू..सत्याग्रह एक्सप्रेस में हुई घटना

Sun, 10 Dec 2023 11:29 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा

सार

बिहार निवासी जितेंद्र सत्याग्रह एक्सप्रेस से हरियाणा मजदूरी करने जा रहा था। उसके साथ पत्नी और सास भी थी। आरोप है कि टीटीई ने उसे थप्पड़ मार दिया। इसके डर से मां-बेटी ट्रेन से कूद गई थी। इस प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। 
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गजरौला रेलवे स्टेशन पर हुआ हादसा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सत्याग्रह एक्सप्रेस ट्रेन में टीटीई द्वारा बिहार के मजदूर को पकड़ने और उससे कूदकर घायल हुईं मां-बेटी के प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। जीआरपी व आरपीएफ से आला अफसरों ने घटनाक्रम की जानकारी ली। स्टेशन अधीक्षक से भी पूछा गया कि पूरा मामला क्या है। उधर जीआरपी को मामले में कार्रवाई के लिए मजदूर की तहरीर का इंतजार है।

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शुक्रवार को बिहार के जिला बेतिया के लोरिया थाना क्षेत्र के गांव मलाही टोला निवासी 25 वर्षीय जितेंद्र अपनी पत्नी अंगरिया देवी व सास कुसुमवती सत्याग्रह एक्सप्रेस ट्रेन से हरियाणा मजदूरी करने जा रहा था। उसकी नौ वर्षीय बेटी अंशु व छह साल का बेटा सिंकू भी साथ था। वह सामान्य टिकट पर स्लीपर कोच में सफर कर रहे थे।

रेलवे स्टेशन पर टीटीई ने जितेंद्र को पकड़ कर नीचे उतार लिया। टीटीई पर आरोप है कि वह मजदूर पर 13 सौ रुपये का जुर्माना लगा रहा था। जिसका वहन करने से इनकार करने पर टीटीई ने उसे दो थप्पड़ भी मार दिए थे। उधर इस बीच ट्रेन चल पड़ी थी। इधर मां कुसुमवती व बेटी अंगरिया देवी ने खिड़की से देखा कि जितेंद्र को टीटीई पकड़ कर ले जा रहा है तो उन्होंने डर के मारे ट्रेन से छलांग लगा दी।
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जिससे दोनों घायल हो गई थीं। घायलों को उपचार के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया था। हैरत की बात यह रही कि आरपीएफ के दरोगा ने मजदूर को प्रताड़ित करने वाले टीटीई को बचाने का प्रयास करते हुए दूसरी ट्रेन पकड़वाई और हरियाणा भेज दिया, जबकि पीड़ित कार्रवाई की गुहार लगा रहा था।

उधर यह मामला सामने आने पर रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी सकते में हैं। स्टेशन अधीक्षक सरदार सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों ने मामले की जानकारी ली थी। जिसके बाद उन्हें घटनाक्रम से अवगत करा दिया है। उधर जीआरपी चौकी इंचार्ज मनोज कुमार का कहना है कि पीड़ित मजदूर ने अभी तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी।

आरपीएफ दरोगा ने पीड़ित को नहीं सुनाने दी अपनी पीड़ा

टीटीई द्वारा मजदूर को पकड़े जाने पर उसकी पत्नी व सास कूदने के कारण घायल हो गई थीं। इस बीच बेटी और बेटा भी स्टेशन पर उतर गए। वह काफी देर गुहार लगाते रहे कि उनके पापा को छोड़ दिया जाए, मगर किसी का दिल नहीं पसीजा। हैरत की बात तो यह रही कि पीड़ित मजदूर को आरपीएफ के एक दरोगा ने अपनी पीड़ा भी नहीं सुनाने दी।

दहशत में ट्रेन से कूद कर घायल हुईं मां-बेटी के बयान दर्ज करने की जरूरत नहीं समझी। अब मामला उछला तो आरपीएफ सक्रिय हुई। दरोगा ने पीड़ित मजदूर जितेंद्र को फोन किया। कहा कि वह उसकी पत्नी और सास का बयान दर्ज करेंगे। दरोगा ने बताया कि घटना के दिन घायल मां-बेटी के बयान दर्ज नहीं किए गए थे। इसलिए एक दो दिन में वहीं जाएंगे।

निजी अस्पताल में भर्ती हैं घायल मां-बेटी

टीटीई द्वारा बिहार के मजदूर को पकड़े जाने पर दहशत में कूदने के कारण घायल हुईं मां-बेटी की हालत में सुधार नहीं है। शुक्रवार को गजरौला से ले जाने के बाद पीड़ित ने उनको हरियाणा में अपने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। पहले दिन उनके उपचार पर आठ हजार रुपये खर्च हो गए। जितेंद्र का कहना है कि उस पर रुपयों का इंतजाम नहीं था। उसने उधार लेकर डॉक्टर को दिए। घायल मां-बेटी अभी कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रहेंगी।

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