नगर में 2005 से चल रहा ईएसआईसी का औषधालय स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यहां मेडिकल अफसर, फार्मेसिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एएनएम की कमी है। ईएसआईसी प्रभारी पर मुरादाबाद का अतिरिक्त चार्ज होने के कारण वह नगर में कभी कभार आते हैं। स्टाफ की कमी के चलते कार्ड धारकों और मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम श्रम विभाग के अधीन आता है, जिसका काम कर्मचारियों के हित में काम करना होता है। हालांकि, ईएसआईसी औषधालय में स्टाफ की कमी है। गजरौला में 20 हजार से अधिक कर्मचारी कई औद्योगिक इकाइयों में काम करते हैं, जिनमें करीब 19,421 कर्मचारियों के ईएसआईसी कार्ड बने हैं। उनको दवा आदि लेने के लिए भटकना न पड़े। इसलिए 2005 से नगर के अवंतिका नगर मोहल्ले में ईएसआईसी का औषधालय चल रहा है। जबकि, उसके साथ ही आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल भी होना चाहिए, जो प्रस्तावित भी है, मगर बना नहीं है। जो औषधालय है, वह भी स्टाफ के अभाव से जूझ रहा है।
अस्पताल में वर्तमान में 13 का स्टाफ होना चाहिए, लेकिन छह से ही काम चलाना पड़ रहा है। डॉ. मयंक कौशिक प्रभारी हैं। हालांकि, उन पर मुरादाबाद के औषधालय का भी अतिरिक्त चार्ज है। इस कारण नगर में कभी कभार आते हैं। प्रभारी का कहना है कि उन्होंने स्टाफ के लिए पत्र लिखा है।
एक भी एएनएम तैनात नहीं
ईएसआईसी के औषधालय में दो मेडिकल अफसर के पद हैं। जिनमें से एक की तैनाती है। दो लैब टेक्नीशियन में से एक ही कार्यरत है। वहीं, पद के हिसाब से दो एएनएम होनी चाहिए, लेकिन एक भी नहीं है। एक ड्रेसर और दो चतुर्थ श्रेणी के पद रिक्त चल रहे हैं। वरिष्ठ लिपिक श्रवण कुमार पर मुरादाबाद का अतिरिक्त चार्ज है। इसलिए वह भी कभी गजरौला और कभी मुरादाबाद के बीच फंसे रहते हैं।
- गजरौला डिस्पेंसरी में स्टाफ की कमी है। वहां के मेडिकल अफसर को लिखकर देना चाहिए। उन्होंने एक बार भी पत्र नहीं लिखा है। जबकि, बाकी डिस्पेंसरी और अस्पतालों में हाल में कुछ और स्टाफ भेजा गया है- तौकीर अहमद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ईएसआई बरेली