ठाकुरद्वारा तहसीलदार के हस्ताक्षर से काटे गए 60.82 लाख रुपये के फर्जी चेक जारी करने के मामले में आरोपी की पहचान कराने और रिकार्ड वैरीफाई कराने के लिए कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को बैंक स्टाफ को बुलवाया। बैंक में गत वर्ष तहसीलदार के नाम से जारी चेक भुगतान के लिए भेजा गया था। जांच में पता चला है कि ये चेक क्लोन बनाकर तैयार किया गया है।
गत वर्ष ठाकुरद्वारा निवासी अरुण धीमान नाम पर 60.82 लाख चेक काटा गया था। खाता अमरोहा के जोयामार्ग स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में था। ठाकुरद्वारा तहसीलदार के हस्ताक्षर से जारी चेक बैंक में भुगतान के लिए पहुंचा। इसमें संदेह लगने पर स्टाफ ने पेमेंट करने से इंकार कर दिया।
इसी दौरान अरुण धीमान का खाता जट बाजार स्थित मुख्य शाखा में स्थानांतरित हो गया। मुख्य शाखा ने भी चेक के भुगतान पर रोक लगा दी। तहसीलदार से पता किया तो बताया गया कि उन्होंने कोई चेक जारी ही नहीं किया है। ये चेक आपदा राहत कोष के खाते से जारी किया गया था। उनके मना करने पर बैंक प्रबंधक ने इसकी जानकारी कोतवाली पुलिस को दी थी। पुलिस इस जांच पड़ताल में जुट गई थी कि चेक जारी करने वाला कौन है।
काफी प्रयास के बाद पुलिस को इसके तार मुजफ्फरनगर से जुड़े मिले। पुलिस टीम उसकी तलाश में मुजफ्फरनगर पहुंची। यहां से एक शख्स को उठाया। मंगलवार को कोतवाली पुलिस ने बैंक स्टाफ को पूछताछ के लिए कोतवाली बुलाया।
कोतवाल शैलेंद्र प्रताप गौतम ने बताया कि धोखाधड़ी के आरोपी की पहचान कराने के लिए बैंक प्रबंधक को कोतवाली बुलाया गया था। जांच में पता चला है कि ये चेक उस खाते के चेकबुक से जारी ही नहीं हुआ है। ये क्लोन कर बनाया गया है। जांच की जा रही है।