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Amroha News: ऑप्टोमिस्ट के सात में से चार पद खाली, कैसे दूर हो आंखों का अंधेरा

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अमरोहा। एक तरफ जहां सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। वहीं डॉक्टरों और स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। स्थिति ये है कि सरकारी अस्पतालों में ऑप्टोमिस्ट (नेत्र परीक्षक) के सात पदों में से चार खाली हैं। ऐसे में न तो मरीजों की आंखों की जांच हो पा रही है और न दवा मिल रही है। मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। वहीं जिला अस्पताल में आज तक ऑप्टोमिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। आंखों के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों से आने वाले सैकड़ों मरीज बिना जांच कराए ही लौटने को मजबूर रहते हैं।
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जिला अस्पताल में 52 पदों के सापेक्ष केवल 20 चिकित्सकों के सहारे स्वास्थ्य सेवाओं दुरुस्त करने की कवायद चल रही है। उसे भी बुरी स्थिति ये है कि सरकारी अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं लचर हालत में हैं। ऑप्टोमिस्ट के आधे से ज्यादा पद वर्षों से खाली पड़े हैं। हालात ऐसे हैं कि जिला मुख्यालय के अस्पताल में ही ऑप्टोमिस्ट यानी नेत्र परीक्षक अधिकारी की तैनाती ही नहीं है, जबकि जिला अस्पताल में ऑप्टोमिस्ट का स्वीकृत इकलौता पद है।
जिला अस्पताल समेत सरकारी अस्पतालों में ऑप्टोमिस्टों के कुल सात पद हैं। इनमें से महज तीन पदों पर ही ऑप्टोमिस्टों को तैनाती मिली हुई है। जिला अस्पताल की बात करें, तो यहां स्थिति ज्यादा बदहाल है। बुधवार और शुक्रवार को आंखों की जांच बंद रहने से ऑप्टोमिस्ट के कक्ष पर ताला लटका रहता है। अस्पताल में सोमवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार व शनिवार को जोया और गजरौला सीएचसी पर तैनात ऑप्टोमिस्ट यहां आकर जैसे-तैसे व्यवस्था संभाल रहे हैं।
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जिला अस्पताल में ड्यूटी कर रहे जोया-गजरौला के ऑप्टोमिस्ट
जिले में सीएमओ के अधीन फिलहाल कुल तीन ऑप्टोमिस्ट हैं। जिन्हें अमरोहा, जोया और गजरौला सीएचसी में तैनाती मिली हुई है। इनमें से अमरोहा सीएचसी पर तो मरीजों को सप्ताह के छह दिन ऑप्टोमिस्ट की सेवाएं मिल रही हैं, लेकिन जोया और गजरौला सीएचसी पर तैनात ऑप्टोमिस्ट को सप्ताह में दो-दो दिन अपने तैनाती स्थल को छोड़कर जिला अस्पताल में ड्यूटी करनी पड़ रही है। मोतियाबिंद, काला मोतिया, चश्मे का नंबर समेत आंखों की कई तरह की जांच कराने के लिए मरीज निजी अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल में आज तक नहीं हुई ऑप्टोमिस्ट तैनाती
सरकारी अस्पतालों में ऑप्टोमिस्ट की कमी से आंखों के मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में शुरू से ही ऑप्टोमिस्ट कि तैनाती नहीं है। अब जिले की सीएचसी पर ऑप्टोमिस्टों की तैनाती की बात करें तो मंडी धनौरा व रहरा सीएचसी में तैनात ऑप्टोमिस्टों के तबादले के सालभर बाद से दोनों ही पद खाली पड़े हैं।
हसनुपर में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा
हसनपुर सीएचसी पर तैनात ऑप्टोमिस्ट की सेवानिवृत्ति के बाद से यहां भी ऑप्टोमिस्ट की कमी चल रही है। यही वजह है कि आंखों की विभिन्न समस्याओं के मरीजों को सरकारी अस्पतालों में जांच व इलाज की सहूलियत मिलने से दूर निजी अस्पतालों का सहारा बना हुआ है।
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- खाली पद पर तैनाती के लिए शासन को कई बार मांग भेजी गई है। फिलहाल सीएमओ के अधीन ऑप्टोमिस्टों के जरिए काम चला रहे हैं।

डा. चरन सिंह,

चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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