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चार हजार बीघे में बचा सिर्फ सौ बीघा जंगल

Mon, 22 Aug 2016 01:19 AM IST
ब्यूरो/अमरोहा अमर उजाला
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forest fire - फोटो : Amar Ujala
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 तहसील क्षेत्र ग्राम जेवड़ा में 254 हेक्टेयर यानी लगभग चार हजार हेक्टेयर भूमि का रकबा दर्ज है, लेकिन मौके पर सिर्फ सौ बीघे में ही जंगल बचा है। तीन सौ बीघे से कहीं अधिक भूमि पर माफिया ने अवैध कब्जा कर फसल लगा रखी है। कब्जे का खुलासा होने के बाद विभाग किरकिरी से बचने को दावा कर रहा है कि कब्जा नहीं है। शेष गंगा के पानी से जमीन कट गई है। 
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हसनपुर तहसील के खादर क्षेत्र में गंगा की रेती पर स्थित वन विभाग की कीमती और उपजाऊ भूमि पर माफिया का कब्जा हो रहा है। हरे पेड़ों को काटकर फसलें उगाई जा रही हैं।

कुछ दिन पहले गंगेश्वरी ब्लाक के गांव बिहारीपुर व पथरा में वन विभाग की लगभग साढ़े तेरह सौ बीघा भूमि पर माफिया की ओर से किए गए कब्जे का खुलासा किया गया था। तहसील प्रशासन ने भी कब्जे की बात को स्वीकार करते हुए फसल की कुर्की कराने की बात कही थी। वन विभाग ने भी सर्वे की बात कही थी। लेकिन फंसने का डर और राजनीतिक दबाव इतना है कि न कुर्की हो पा रही है और न ही सर्वे।
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अब जेबड़ा ऐतमाली और शहबाजपुर गूर्जर के जंगल में तीन सौ बीघे से ज्यादा वन विभाग का जंगल दबंग और माफिया के कब्जे में होने का मामला सामने आया है। करीब पंद्रह-सोलह साल पहले गांव जेबड़ा ऐतमाली के जंगल में गंगा की रेती पर वन विभाग की 254 हेक्टेयर यानी लगभग चार हजार बीघा भूमि दर्ज की गई थी, जिस पर पौधे लगवाए गए थे। ये आज भी कागजों में ज्यों की त्यों है।

जमीनी हकीकत इससे कहीं परे है। मौके पर वन विभाग की लगभग सौ बीघा भूमि पर ही जंगल बचा है। तीन सौ बीघे से कहीं अधिक भूमि पर माफिया का कब्जा है। भूमि वन विभाग के अधिकारी शेष जमीन को गंगा में कटी बता रहे हैं। जमीन का सर्वे हुआ कब्जा की गई जमीन का रकबा और बढ़ सकता। इसमें कइयों की गर्दन भी फंस सकती है। इसलिए सर्वे में हीलाहवाली बरती जा रही है।
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