अमरोहा। खादर क्षेत्र के किसानों के लिए बरसात राहत नहीं, बल्कि हर साल नई मुसीबत लेकर आती है। गंगा का जलस्तर बढ़ते ही तटबंध के अभाव में पानी खेतों तक पहुंच जाता है और महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो जाती है। फसल को खो देने वाले हजारों किसानों को सरकार की ओर से मुआवजे के नाम पर दी जाने वाली राशि से फसल की लागत भी नहीं निकल पाती। किसानों का कहना है कि सरकार लाखों रुपये के नुकसान के बदले मात्र कुछ हजार रुपये देकर उनके साथ मजाक कर रही है।
बाढ़ में फसल नष्ट होने से बैंकों का कर्जा बढ़ता ही जा रहा है। पिछले साल हसनपुर और धनौरा तहसील क्षेत्र के करीब 40 गांव बाढ़ की चपेट में आए थे। सर्वे में 13275 किसानों की 363036 हेक्टेयर फसल बर्बाद मिली थी। बाढ़ से हुए नुकसान को देखते हुए सरकार ने आपदा राहत कोष से प्रशासन को 7.37 करोड़ रुपये दिए थे। प्रशासन ने चिह्नित किसानों को 66483046 रुपये मुआवजे के तौर पर बांटे। हसनपुर के 7673 किसानों को 32351769 रुपये और धनौरा के 5602 किसानों को 34131277 रुपये दिए गए। शुरुआत में 1047 किसानों के 4892619 रुपये बैंक खातों में आईएफएससी कोड बदलने के कारण वापस हो गए थे। बाद में खाते अपडेट कराकर यह रकम भी किसानों को भेज दी गई थी। हालांकि अभी तक सैकड़ों किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।
फसल डूबती है, कर्ज बढ़ता है
खादर के किसानों की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उसके बाद बढ़ता कर्ज है। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, जुताई और सिंचाई पर खर्च करने के बाद फसल बाढ़ में बर्बाद हो जाती है। इसके बाद मिलने वाला मुआवजा वास्तविक नुकसान की तुलना में बहुत कम होता है। ऐसे में बैंक का कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो जाता है।
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ये हैं बाढ़ प्रभावित गांवों
हसनपुर और मंडी धनौरा क्षेत्र पपसरी खादर, मुकारमपुर, शाहजहांपुर छात, रानी बस्तौरा, विशावली, रमपुरा खादर, चांदरा फार्म और रसूलपुर भांवर समेत कई गांवों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं। वहीं चकनवाला, अलीनगर, मुरादपुर, पपसरा खादर, तिगरी, मोहरका पट्टी, ओसीता जगदेवपुर और मोहम्मदाबाद समेत कई गांवों के खेतों में फसलें पानी में डूबी रहीं। धौरिया, बिड़ला, दियावली खालसा, चक की मढैया, गंगाचोली, श्यामपुरी, सिरसा गुर्जर, पिपलौती, गंगानगर, महमूदाबाद, जल्लोपुर, नानई, विरामपुर, हैदलपुर, मंगटा, पौरारा, मुबारिकपुर, जीवपुर और सलारा समेत कई गांवों में भी फसलें प्रभावित हुई हैं।
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इस बार भी 60 गांवों में 10 हजार किसानों की फसल बर्बाद
अमरोहा। गंगा का जलस्तर घटने के साथ ही खादर क्षेत्र में बाढ़ से हुई तबाही की तस्वीर साफ होने लगी है। हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के 60 से अधिक गांवों में करीब 10 हजार हजार से ज्यादा किसानों की फसल बर्बादी की कगार पर है। लंबे समय तक पानी में डूबी धान और अन्य फसलें गलकर खराब हो गई हैं, जबकि गन्ने को भी भारी नुकसान हुआ है। पिछले करीब डेढ़ महीने से ग्रामीण गंगा के कटान और जलभराव की मार झेल रहे हैं। कई स्थानों पर कटान में खेत और खड़ी फसलें नदी में समा गई हैं।
क्या बोले किसान
चांदरा फार्म निवासी मलकीत सिंह ने बताया कि पिछले साल बाढ़ में 45 बीघा भूमि में खड़ी गन्ने और धान की फसल बर्बाद हो गई थी। सरकार से मुआवजे के नाम पर केवल 2,000 रुपये मिले। इतनी बड़ी फसल क्षति के मुकाबले यह राशि बेहद कम है। सरकार को वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए।
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पूर्व प्रधान सुमरती देवी ने बताया कि बाढ़ में उनकी 20 बीघा भूमि पर खड़ी गन्ने की फसल बर्बाद हो गई। मुआवजे के नाम पर खाते में 5,472 रुपये आए हैं। इतनी रकम से खेत की जुताई का खर्च भी पूरा नहीं होगा। शासन और प्रशासन को किसानों की वास्तविक स्थिति को देखते हुए नुकसान के मुताबिक मुआवजा देना चाहिए।
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चांदरा फार्म निवासी विधा कौर ने कहा कि सरकार मुआवजे के नाम पर केवल खानापूरी कर रही है। हर साल बाढ़ में फसल बर्बाद होने से किसानों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को बार-बार होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत तटबंध बनवाने चाहिए, ताकि फसल और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
इब्राहीमपुर निवासी होशियारी देवी ने बताया कि बाढ़ से नष्ट हुई फसल का करीब 90 प्रतिशत किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। पिछले साल भी उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला था। इस बार भी फसल नुकसान का सर्वे शुरू नहीं हुआ है। सरकार को मुआवजे का आकलन करते समय किसानों के वास्तविक नुकसान को ध्यान में रखना चाहिए।
अधिकारी बोले
वर्ष 2025 में बाढ़ से प्रभावित करीब 13 हजार किसानों को सात करोड़ रुपये की धनराशि का वितरण किया गया। इस वर्ष के लिए तहसील स्तर से सर्वे कराया जा रहा है। 30 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है। जिसे शासन को भेजा जाएगा। - पवन शुक्ला, जिला आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ
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किसान अपनी फसल का बीमा कराएं। उनको भुगतान किया जाएगा। 72 घंटे के अंदर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। टोल फ्री नंबर 14447 पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जिन क्षेत्रों में बाढ़ आई। वहां की फसलों का सर्वे कर लिया गया है। जिसकी रिपोर्ट कृषि विभाग को दे दी गई है। -रिशु कुमार, जिला कॉर्डिनेटर, बीमा कंपनी