बिजनौर बैराज से गंगा में 97691 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण गंगा के जल स्तर में दस सेंटीमीटर वृद्धि होने से इलाके के लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। गंगा किनारे गांवों के खेतों में पानी भरने से लौकी, तोरई और लोभिया की फसल बर्बाद होने की आशंका है। खेतों और रास्ते में पानी भर जाने के कारण ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर चारा लाने को मजबूर हैं।
शनिवार की शाम बिजनौर बैराज से गंगा में एक लाख बयासी हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। आधी रात के बाद जल ने अमरोहा जिले की सीमा में प्रवेश किया था। जिसके बाद गंगा उफान पर आ गई। रविवार को गंगा का जल स्तर 85 सेंटीमीटर बढ़ने के कारण इलाके में बाढ़ के हालात पैदा हो गए। तिगरी में जल स्तर 200.60 गेज मीटर हो गया था।
सोमवार को गंगा में 97691 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिसके कारण जल स्तर में महज दस सेंटीमीटर की ही वृद्धि हुई।
तिगरी का जल स्तर 200.70 गेज मीटर दर्ज किया गया। पानी भले ही दस सेंटीमीटर बढ़ा, लेकिन बाढ़ की स्थिति बन गई है।
ओसीता जगदेवपुर निवासी राकेश कुमार का कहना है कि उनके खेतों में लौकी, तोरई और लोभिया की फसल थी। जिसके मरने का डर हो गया है। दारानगर के मंगत सिंह ने बताया कि बाढ़ के हालात तो हैं, लेकिन पानी अभी गांव में नहीं भरा है। निचले इलाके के खेत ही पानी से भर गए हैं।
तिगरी निवासी ओमपाल सिंह केवट, घासी सिंह का कहना है कि उनके गांव सामने के खेत पानी से लबालब हो गए हैं। जिससे चारा आदि लाने में दिक्कत हो रही है। उधर ओसीता जगदेवपुर का खेतों को जाने वाला रास्ता पानी से भरने के कारण ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर चारा लाने को मजबूर हैं।
जेई अनवर बहादुर खान का कहना है कि तिगरी में गंगा का जल स्तर 200.70 गेज मीटर दर्ज किया गया, यहां पर खतरे का निशान 202 गेज मीटर है। खतरे के निशान से गंगा 130 सेंटीमीटर दूर है।