उत्तराखण्ड के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश से खादर क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इसको भांपते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। किनारों का काट रहीं गंगा से किसी अनिष्ट की आशंका को देखते हुए एडीएम ने बाढ़ आशंकित क्षेत्रों का निरीक्षण कर निचले इलाकों के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं कर्मचारियों का अलर्ट रहने और जलस्तर पर नजर रखने की हिदायत दी है।
शनिवार दोपहर 12 बजे हरिद्वार बैराज से गंगा में 96353 क्यूसेक और बिजनौर से 120827 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस दिन ब्रजघाट पर गंगा का जलस्तर 198.20 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 199.34 मीटर है। गंगा में उफान से पैड़ियां भी डूब गईं हैं।
वहीं तिगरी का जलस्तर 201.00 मीटर से ऊपर तकरीबन 201.25 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान 202.20 मीटर से ज्यादा दूर नहीं रह गया है। तिगरी में तो ये आलम है कि गंगा का पानी तट की झुग्गियों को पार कर अंदर की ओर आ गया है। श्मशान घाट स्थल पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। इतना ही नहीं गंगा किनारे के खेतों में भी पानी भर गया है। हालांकि यहां अधिकतर खेत खाली पड़े हैं।
उधर, शनिवार को अपर जिलाधिकारी एमए अंसारी ने ग्राम शेरपुर, सीपीया फार्म आदि का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ चौकियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने और निचले इलाके में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर भेजने के निर्देश दिए। बाढ़ आशंकित गांव के लोगों ने चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध न कराने पर प्रशासन की आलोचना की है। एडीएम ने एसडीएम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध न कराने पर नाराजगी जाहिर की।
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