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मेडिकल तो कराया... नहीं की कार्रवाई, इंसाफ को भटकता रहा परिवार

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अमरोहा। याची और उसका परिवार 24 दिन तक थाना पुलिस के चक्कर काटता रहा लेकिन, इंसाफ नहीं मिला। याची का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के बाद उसका मेडिकल कराया था। लेकिन आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हारकर पीड़ित को न्यायालय की शरण लेने पड़ी। कोर्ट ने जब इंस्पेक्टर, दरोगा और चार सिपाहियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए तो पुलिस महकमे में खलबली मची है।
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मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव खेड़ा वाली मढै़या में दो पक्षों के बीच मारपीट हो गई थी। इसमें दोनों पक्षों की तरफ से एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन दूसरे पक्ष ने याचिकाकर्ता अनुज कुमार के पिता भजन सिंह और उसके दो भाइयों पर छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कराया दिया था। छेड़छाड़ का फर्जी एफआईआर दर्ज होने पर नाराज अनुज कुमार और उनके परिजन ग्रामीणों के साथ बारह मार्च को एसपी से मिलने जा रहे थे। एसपी से शिकायत करना पुलिस को नागवार गुजर रहा था। इसलिए उन्होंने थाने के सामने ट्रैक्टर को रोकर परिवार को उतार लिया। यहां उनके साथ मारपीट की। जातिसूचक शब्द कहे और हवालात में डाल दिया। सात घंटे हिरासत में रखने के बाद आरोपी पुलिस कर्मियों ने अनुज कुमार सहित करीब दस लोगों शांतिभंग में चालान कर दिया था। इसके बाद तेरह मार्च को पीड़ित परिवार एसपी से मिला। आरोपी पुलिस कर्मियों की करतूत बयां की। अनुज के मुताबिक एसपी डॉ विपिन ताडा के निर्देश पर उसका मेडिकल कराया गया। लेकिन, पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। 25 जून को एक बार फिर एसपी को शिकायती पत्र देकर इंसाफ की गुहार लगाई था। चौबीस दिन तक कोई कार्यवाई नहीं हुई, तो पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। अब न्यायालय ने एफआईआर के आदेश दिए तो पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है।
अनुज कुमार के पक्ष और ग्राम प्रधान पक्ष से मारपीट का मामला था। दोनों पक्षों की तरफ एफआईआर हुई थी। दोनों पक्ष जेल गए थे। पुलिस कर्मियों पर लगाए गए सभी आरोप निराधार है। अभी तक हमारे पास न्यायालय से आदेश की कोई कॉपी नहीं मिली है।
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- सरवेंद्र शर्मा, इंस्पेक्टर, धनौरा थाना
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