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गड़बड़ी की आशंका में रालोद व भाकियू कार्यकर्ताओं ने काटा जमकर हंगामा, पुलिस से हुई धक्कामुक्की

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मंडी धनौरा(अमरोहा)। ब्लाक प्रमुख पद के नामांकन के दौरान धनौरा ब्लाक में गुरुवार को गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर रालोद, सपा व भाकियू कार्यकर्ताओं ने ब्लाक कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा काटा। भाजपा प्रत्याशी के साथ ब्लाक कार्यालय के भीतर जाने की सूचना मिलने पर रालोद व भाकियू कार्यकर्ता बिफर गए। ब्लाक कार्यालय का मेनगेट तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ जमकर धक्कामुक्की हुई। मेनगेट पर लगा मेटल डिटेक्टर धक्कामुक्की में क्षतिग्रस्त हो गया। भाकियू कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के बीच भारी पुलिस बल की मौजूदगी में भाजपा विधायक बाहर चले गए।
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गुरुवार को ब्लाक कार्यालय पर ब्लाक प्रमुख पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। दोपहर लगभग 12 बजे रालोद प्रत्याशी आशा चंद्रा रालोद, सपा व भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ ब्लाक कार्यालय पहुंचीं। यहां रालोद व भाकियू कार्यकर्ताओं ने आते ही नारेबाजी शुरू कर दी। तानाशाही नहीं चलेगी, गुंडागर्दी नहीं चलेगी के नारे लगाए जाने लगे। रालोद व भाकियू कार्यकर्ताओं को आशंका थी कि पुलिस सत्ताधारी पार्टी के दबाव में उनका नामांकन दाखिल नहीं होने देगी। आशा चंद्रा के साथ उनके अनुमोदक व प्रस्तावक को भीतर जाने की अनुमति प्रदान की गई। इस दौरान भारी संख्या में रालोद व भाकियू कार्यकर्ता ब्लाक कार्यालय के बाहर जमे रहे।
आधा घंटे बाद भाजपा प्रत्याशी सविता रानी भी दल बल के साथ ब्लाक कार्यालय पहुंच गईं। भाजपा प्रत्याशी के साथ विधायक राजीव तरारा व पालिकाध्यक्ष राजेश सैनी को भीतर जाता देख रालोद व भाकियू कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने दोनों को बाहर निकालने की मांग को लेकर हंगामा काटना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने मेनगेट को तोड़ने का प्रयास किया। पुलिस भीतर से गेट को टूटने से बचा रही थी। कार्यकर्ताओं ने ट्रैक्टर से गेट तोड़ने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से गेट टूटने से बच गया। पर्याप्त पुलिस बल नहीं होने की वजह से कार्यकर्ता बेहद उग्र हो गए थे। इस दौरान गेट पर लगा मेटल डिटेक्टर क्षतिग्रस्त हो गया। हंगामे के दौरान सीओ सत्येंद्र कुमार ने किसी तरह विधायक से वार्ता कर उनको बाहर जाने के लिए राजी कर लिया। विधायक व पालिकाध्यक्ष के बाहर जाने पर कार्यकर्ता शांत हो गए। इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस से कई बार धक्कामुक्की भी हुई। यहां कपिल चंद्रा, डूंगर सिंह, दानवीर सिंह, रामवीर सिंह, महाराज सिंह, अजय गिल, धर्मेंद्र सिंह, कपिल प्रधान आदि मौजूद थे।
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डीएम व एसपी की मौजूदगी में हंगामा
मंडी धनौरा। सत्ताधारी पार्टी के दबाव में नामांकन ही जमा नहीं करने की आशंका की वजह से ब्लाक कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में रालोद, सपा व भाकियू कार्यकर्ता जमा हो गए। रालोद गठबंधन प्रत्याशी के समर्थकों को आशंका थी कि आशा चंद्रा का नामांकन जमा नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान जिलाधिकारी बालकृष्ण त्रिपाठी व एसपी पूनम ब्लाक कार्यालय पहुंच गए। उनको देेखकर कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा शुरू कर दिया। डीएम ने उनको समझाने का प्रयास किया। लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे। रालोद व भाकियू कार्यकर्ताओं के तेवर को देखते हुए दोनों अधिकारी अधीनस्थों को दिशा निर्देश देते हुए अमरोहा चले गए।
नामांकन पत्र वैध पाए जाने पर नारेबाजी कर खुशी मनाई
मंडी धनौरा। नामांकन अवधि के बाद नामांकन पत्रों की जांच का काम शुरू किया गया। यहां रालोद प्रत्याशी ने तीन सेट व भाजपा प्रत्याशी सविता रानी ने दो सेट जमा किए। नामांकन पत्रों की जाँच के दौरान बड़ी संख्या में रालोद कार्यकर्ता बाहर मौजूद रहे। चार बजे निर्वाचन अधिकारी संजीव सिंह द्वारा सभी नामांकन पत्र वैध पाए जाने की घोषणा की तो रालोद कार्यकर्ताओं ने खुशी में जमकर नारेबाजी की। रालोद प्रत्याशी आशा चंद्रा के पुत्र कपिल चंद्रा विजयी मुद्रा बनाते हुए बाहर आए और अपनी माता का नामांकन वैध पाए जाने की सूचना कार्यकर्ताओं को दी। कार्यकर्ताओं का कहना था कि एक किला तो फतह कर लिया गया है। अब 10 जुलाई को अग्नि परीक्षा होगी।
किसानों के रवैए से हैरान नजर आए भाजपाई
मंडी धनौरा। भाजपा के विरोध में किसानों द्वारा जमकर हंगामा करने से भाजपाई बेहद हैरान हैं। उनको समझ नहीं आ रहा है कि रालोद के मुट्ठी भर कार्यकर्ताओं के मुकाबले भारतीय किसान यूनियन के हजारों कार्यकर्ता कैसे ब्लाक कार्यालय पर विरोध करने के लिए आ गए। दरअसल राष्ट्रीय लोकदल के चुनाव प्रबंधकों ने किसानों की भाजपा सरकार से नाराजगी को देखते हुए उनसे सहयोग की अपील की। किसान संगठनों को भी अपने विरोध के प्रदर्शन का इससे बढ़िया मौका मिलने वाला नहीं था। भारतीय किसान यूनियन टिकैत व भाकियू असली के हजारों कार्यकर्ता ब्लाक कार्यालय पर पहुंच गए। इतनी बड़ी तादाद में किसानों के आने की जानकारी भाजपाइयों को मिल गई थी। पार्टी के एक जिला स्तरीय पदाधिकारी ने इस पर आश्चर्य भी व्यक्त किया। उनका कहना था कि यदि यह नाराजगी विधानसभा चुनाव तक बरकरार रही तो पार्टी को मुश्किल हो सकती है। शायद पहली बार किसी सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को मायूस और बैकफुट पर आता देखा गया है।
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