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संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है पिता

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अमरोहा। पिता एक पेड़ की तरह होते हैं, जिनकी छांव में हमारा पूरा जीवन सुरक्षित होता है। पिता के होने पर हमें किसी का ना तो डर होता है और ना ही हम अपने सामने आने वाली परेशानियों को बड़ा समझते हैं। कई बार तो हम अपनी सारी परेशानियों को पिता के कंधों पर ही छोड़ देते हैं। पिता एक उम्मीद, एक आस है, परिवार की हिम्मत और विश्वास है। बाहर से सख्त अंदर से नर्म है, उसके दिल में दफन कई मर्म हैं। पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है। परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है। बचपन में खुश करने वाला खिलौना है, नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है। पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी है। सबको बराबर का हक दिलाने वाला एक महारथी है। सपनों को पूरा करने वाली जान है। पिता से जिंदगी की पहचान है। पिता जमीर है पिता जागीर है, जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है। पिता की छांव में कई बेटे और बेटियों ने मुकाम हासिल किया है।
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मेरे पिता... मेरे गुरु भी
जिले के जिलाधिकारी उमेश मिश्र का कहना है बाप के नाम का सहारा कायर लोग लेते हैं। बाबूजी हमेशा यही सीख देते हैं। कहते थे कि अपने बल पर आगे बढ़ो। अपने मेहनत, कार्य व्यवहार पर भरोसा रखो। मेहनत का विकल्प आज तक खोजा ही नहीं गया है। शॉर्टकट से प्राप्त सफलता भी शॉर्टकट होती है। इसलिए सदैव आत्म निर्भर बनने के साथ सही रास्ते पर चलना चाहिए। मेरे बाबूजी गुरु भी और पिता भी हैं। वह शिक्षक थे, अब रिटायर हो गए हैं। बाबूजी द्वारा दी गई सीख हमेशा याद रहती हैं। वह कहते थे कि मैं तुम्हें कुछ नहीं दूंगा। बल्कि अपने बल पर आगे बढ़ने का आत्मबल और विश्वास दूंगा। फिर भी वह हमेशा संघर्षों की आंधियों में हौसलों की दीवार बनकर खड़े रहे हैं।
जीवन में जिम्मेदारी के सारथी है पिता
जिले के कप्तान डॉ विपिन ताडा और उनके पिता मंछाराम ताडा एक दोस्त की तरह हैं। अपनी छोटी-बड़ी बातें उनके साथ शेयर करते हैं। बचपन में वह पढ़ाई पर जोर देते थे। कभी डाटते नहीं थे, दोस्त जैसा व्यवहार करते थे। प्यार से समझाते थे। उनका स्ट्रगल मेरे जीवन के लिए प्रेरणा बना है। वह बेहद सरल स्वभाव के हैं। उन्होंने गांव से निकलकर खुद को शहर में स्थापित किया। आज जो भी माता-पिता की दुआ और आशीर्वाद की वजह से हैं। डॉ विपिन आज भी पिता से मार्गदर्शन लेते हैं। पिता एक उम्मीद, एक आस है, परिवार की हिम्मत और विश्वास है। बच्चों के जीवन में माता-पिता बड़ी अहमियत है। पिता जीवन में जिम्मेदारी के सारथी होते हैं।
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माँ के चरणों में जन्नत है तो पिता जन्नत का दरवाजा है
हाशमी एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ सिराजुद्दीन हाशमी कहते हैं कि मां के चरणों में जन्नत है, तो पिता जन्नत का दरवाजा हैं। माता-पिता की खिदमत करना बच्चों की खुशनसीबी होती है। पिता बचपन में खुश रखने वाला खिलौना और परेशानियों में लड़ने वाली तलवार होता है। बच्चे हमेशा मां-बाप के कर्जदार रहते हैं। उनकी नफरत में प्यार और डांट में आशीर्वाद होता है। आज जो कुछ हैं सब पिता की दुआओं का असर है। वह हमेशा कहते थे कि इंसान की खिदमत करना सबसे बड़ा धर्म है। जहां पैसा खर्च होता हो वहां किसी का एहसान नहीं लेना चाहिए। आज वह इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनकी दुआएं साथ हैं।
चार भाइयों से पूछो जिंदगी में पिता की अहमियत
डॉ फाइक अली कहते हैं कि जिंदगी के उतार-चढ़ाव में पिता की बहुत बड़ी अहमियत होती है। वह पेशे से किसान हैं। हम चार भाई हैं। पिता सारी परेशानियों अपने कंधों पर लेते थे। उनका लक्ष्य बच्चों को कामयाब बनाना रहा है। उनकी डाट में हमें भविष्य नजर आता था। उनकी दुआओं से मैं डॉक्टर हूं तो अन्य भाई इफ्तेखार सैफी अधिवक्ता, अब्बास अली इंजीनियर और शकील अहमद बैंक कर्मचारी हैं। हमारा यहां तक पहुंचना पिता की कड़ी मेहनत का नतीजा है। पिता हर परिस्थिति में अपने बच्चों के साए के रुप में खड़े रहते हैं। उन्होंने हमेशा सच बोलना, कड़ी मेहनत करना और खुद पर भरोसा करना जीवन में सफलता की कुंजी बताया है।
पिता से जिंदगी की पहचान
फादर्स डे के मौके पर डॉ नवीन कुमार खरे कहते हैं उनके पिता ऋषिपाल सिंह सिर्फ बाप-बेटे ही नहीं हैं, दोनों बहुत अच्छे दोस्त भी हैं। पिता के साथ बहुत अच्छी ट्यूनिंग है। वह अपनी सारी बातें अपने पापा से शेयर करते हैं, जो वो अपने दोस्तों से नहीं करते है। क्योंकि पिता की डांट में प्यार छुपा होता है। उनसे हमेशा सही सलाह मिलती और परेशानियां भी कम होती है। नवीन खरे बताते हैं पिता से जिंदगी की पहचान है। पिता जमीर है पिता जागीर है, जिसके पास पिता है वह सबसे अमीर है। पिता वह अपना पूरा जीवन बच्चों और परिवार के भविष्य को उज्जवल बनाने में लगा देते हैं। वह पेशे से किसान है, लेकिन उन्होंने मुझे डॉक्टर बनाया। मुझे मेरे पिता पर गर्व है।
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