अमरोहा। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर अगस्त और सितंबर में तीन-तीन लाख रुपये निकालने के मामले में सीडीओ ने डीपीआरओ को जिले की 66 ग्राम पंचायतों की दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि धनराशि निकालने के लिए डीएम से अनुमति नहीं ली गई थी। पिछली जांच रिपोर्ट में खर्च और अनुमति का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। इसके बाद प्रशासकों के माध्यम से काम हो रहे हैं। मई से अगस्त तक के आंकड़ों में अमरोहा ब्लॉक की 14, हसनपुर की सात, धनौरा की पांच, गजरौला की आठ, गंगेश्वरी की 20 और जोया की 13 ग्राम पंचायतों में तीन-तीन लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने की बात सामने आई थी।
अमरोहा ब्लॉक की 105 ग्राम पंचायतों को पांचवें वित्त आयोग से 95.65 लाख रुपये मिले, जिसमें 93.76 लाख खर्च हुए। राज्य वित्त आयोग से मिले 19.81 लाख रुपये में से 19.57 लाख खर्च किए गए। हसनपुर की 87 ग्राम पंचायतों को पांचवें वित्त आयोग से 68.38 लाख रुपये मिले, जिनमें 63.27 लाख खर्च हुए। वहीं, राज्य वित्त से मिले 13.11 लाख रुपये में से 9.12 लाख खर्च किए गए।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई ग्राम पंचायतों में फागिंग के नाम पर आठ हजार रुपये के बजाय 28 हजार रुपये तक के बिल-बाउचर बनाए गए। पहले हुई जांच में यह देखना था कि निकाली गई धनराशि खर्च करने के लिए डीएम से अनुमति ली गई थी या नहीं, लेकिन रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
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ग्राम पंचायतों से धनराशि निकालने के मामले में जिले की 66 ग्राम पंचायतों में दोबारा से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीपीआरओ को इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। जिसमें स्पष्ट रुप से सामने आना चाहिए कि धनराशि किस काम के लिए निकाली गई और उसके लिए अनुमति ली गई या नहीं।
-अश्वनी कुमार मिश्र,सीडीओ