अमरोहा। जिले के परिषदीय विद्यालयों में नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल 2025 से शुरू हुए तीन महीने बीतने को हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश भी समाप्त होने वाला है, लेकिन विद्यार्थियों को अभी तक पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति तो यह है कि कक्षा एक, दो और तीन के लिए एक भी किताब उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। साफ है कि छुट्टी खत्म होने के बाद भी विद्यार्थी बिना किताबों के पढ़ेंगे। फिलहाल कक्षा चार और पांच के लिए कुछ किताबें ही उपलब्ध कराई गई हैं और वह भी सभी स्कूलों में वितरित नहीं हो सकी हैं।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों के लिए किताबें ही शिक्षा का एकमात्र सहारा होती हैं, लेकिन इस सत्र में उन्हें मूलभूत शिक्षण सामग्री से भी वंचित रखा जा रहा है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, जो बिना किताबों के अपनी कक्षाओं में आने को मजबूर हैं। शिक्षक भी बिना पाठ्यपुस्तकों के बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
कक्षा चार और पांच के लिए कुछ किताबें ही उपलब्ध कराई गई हैं, और वह भी सभी स्कूलों में वितरित नहीं हो पाई हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब सरकार सब पढ़ें, सब बढ़ें का नारा देती है, तो फिर परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों होता है। शिक्षा विभाग की इस लापरवाही से बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता दिख रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही किताबों की व्यवस्था नहीं की गई तो बच्चों का पढ़ाई प्रभावित होगी।
- कक्षा एक से पांच तक के प्राथमिक स्कूलों में किताबें उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ विद्यालयों में पहले से ही किताबें पहुंच चुकी हैं। शिक्षा की गुणवत्ता के साथ बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।-भारत भूषण, खंड शिक्षा अधिकारी, जोया।