गजरौला। स्माल स्केल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन व गजरौला इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईवे पर पैदल यात्री पुल बनाए जाने की मांग उठाई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जिला पंचायत अध्यक्ष, सांसद, पूर्व सांसद और जिला प्रशासन को पत्र भेजा है। कहा है कि पुल नहीं होने के कारण अब तक कई श्रमिकों की हादसे में मौत हो चुकी है।
गजरौला में नाईपुरा व सादुल्लेपुर के सामने छोटी-बड़ी करीब 40 औद्योगिक इकाई हैं। जिनमें करीब 20 हजार श्रमिक काम करते हैं। जिनमें काम करने आने जाने के लिए श्रमिकों को हाईवे पार करना पड़ता है। रात में गलत दिशा से आते जाते समय सामने से वाहन की लाइट में दिखाई नहीं देती। जिसके चलते हादसा होने का डर बना रहता है। इसके लिए दोनों एसोसिएशन काफी समय से पैदल यात्री पुल व अंडरपास बनाए जाने की मांग उठा रही हैं। अंडरपास स्वीकृत हो गया है, लेकिन काम शुरू नहीं किया गया है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जिला प्रशासन, जिला पंचायत अध्यक्ष ललित तंवर, सांसद कुंवर दानिश अली व पूर्व सांसद चौधरी कंवर सिंह तंवर से कई बार पैदल यात्री पुल बनवाने की मांग उठाई है। हाईवे की दूसरी तरफ श्रीराम मंदिर सहित अन्य मंदिर, गुरुद्वारा व मस्जिद हैं। हाईवे पार न करना पड़े, इसके लिए पैदल यात्री पुल व अंडरपास बनाया जाए।
-सुनील दीक्षित, संयोजक गजरौला इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
औद्योगिक इकाइयों में काम करने के लिए सबसे अधिक दिक्कत श्रमिकों को होती है। पैदल यात्री पुल नहीं होने के कारण जान जोखिम में डाल हाईवे पार करते हैं। उनके साथ किसी तरह का हादसा न हो, इसके लिए पैदल यात्री पुल बनाए जाने की मांग की गई है।
-अभिषेक त्यागी अध्यक्ष, स्माल स्केल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन गजरौला
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औद्योगिक क्षेत्र में दो कॉन्वेंट स्कूल, परिषदीय विद्यालय और एक इंटर कॉलेज हैं। जिनमें तीन हजार से अधिक छात्र-छात्रा पढ़ाई कर रहे हैं। नाईपुरा के सामने हाईवे पर अंडरपास और पैदल यात्री पुल नहीं है। जिसके चलते श्रमिकों, छात्र-छात्राओं के साथ हादसे का डर बना रहता है। पैदल यात्री पुल बन जाने पर हादसे का डर नहीं रहेगा।
-पीपी सिंह, संयोजक स्माल स्केल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन गजरौला
पूर्व में इस मांग को एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चेतन चौहान ने भी उठाया था। इस मांग को लगातार उठा रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण गंभीरता से नहीं ले रहा है। जिसका खामियाजा श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है।
-वीसी भारद्वाज, औद्योगिक इकाई, गजरौला
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