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लोभ छोड़ संतोष अपनाना ही उत्तम शौच धर्म : सौरभ जैन

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अमरोहा। जैन मंदिर कोट में चल रहे दशलक्षण पर्व के चौथे दिन शनिवार को उत्तम शौच धर्म मनाया गया। मंदिर में जिनेंद्र अभिषेक, रिद्धि मंत्रों के साथ शांतिधारा और दशलक्षण मंडल विधान हुआ। शाम को आरती व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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सांगानेर से आए शास्त्री सौरभ जैन ने प्रवचन में कहा कि शौच का अर्थ केवल शरीर, कपड़े और वातावरण की सफाई नहीं, बल्कि आत्मा की आंतरिक पवित्रता है। आत्मा का सबसे बड़ा मल लोभ है। असीम इच्छाएं और लोभ ही दुख व अशांति का प्रमुख कारण हैं। बाहरी सफाई से शरीर की गंदगी दूर हो सकती है, लेकिन मन की अशुद्धि नहीं।
उन्होंने कहा कि जो मिला है, उसमें संतोष करने से लोभ कम होता है और शांति मिलती है। सरलता, ईमानदारी, निष्कपट व्यवहार और संतोष आत्मा की वास्तविक शुद्धि के साधन हैं। श्रद्धालुओं से लोभ, परिग्रह और स्वार्थ त्यागकर संतोष व पवित्रता अपनाने का आह्वान किया।
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इस अवसर पर जैन समाज समिति अध्यक्ष योगेश जैन, मंत्री शरद जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, राहुल जैन, हर्षित जैन, नमन जैन, पुष्प जैन, सिद्ध जैन, पीयूष जैन, अभय जैन, विनय जैन, सरिता जैन, प्रेमलता जैन, नीरज जैन, सीमा जैन, केसर जैन, बीना जैन, सपना जैन और आकांक्षी जैन मौजूद रहे।
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